
मोहाली: देश की सबसे बड़ी परिवहन सेवा भारतीय रेलवे को बुनियादी सुविधाओं में लापरवाही भारी पड़ गई है। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, एसएएस नगर ने एक अहम फैसले में रेलवे को सेवा में गंभीर कमी का दोषी मानते हुए 60,000 रुपये का जुर्माना लगाया है। यह फैसला यात्रियों के अधिकारों और सुविधाओं को लेकर एक मजबूत संदेश के रूप में देखा जा रहा है।
मामला एक वरिष्ठ नागरिक की लंबी ट्रेन यात्रा से जुड़ा है, जहां उन्हें 24 घंटे से अधिक समय तक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधा से वंचित रहना पड़ा। शिकायत के अनुसार, 3-टियर एसी कोच में यात्रा के दौरान सभी शौचालय गंदे और उपयोग के लायक नहीं थे। कई बार शिकायत करने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ, जिससे यात्री को शारीरिक और मानसिक रूप से गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ा।
रेलवे ने अपने बचाव में सफाई व्यवस्था को ठेकेदार की जिम्मेदारी बताते हुए पानी की कमी और अधिक उपयोग का हवाला दिया। साथ ही यह भी तर्क दिया कि शौचालय सुविधा के लिए अलग से शुल्क नहीं लिया जाता, इसलिए इसे सेवा में कमी नहीं माना जा सकता। हालांकि, आयोग ने इन दलीलों को खारिज करते हुए साफ कहा कि टिकट किराए में ही सभी बुनियादी सुविधाएं शामिल होती हैं और उनकी उपलब्धता सुनिश्चित करना रेलवे की जिम्मेदारी है।
आयोग ने अपने आदेश में शिकायतकर्ता को 30,000 रुपये मुआवजा देने के साथ अन्य मदों में भी राशि जमा करने के निर्देश दिए हैं। इस फैसले को उपभोक्ता अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है, जो यह स्पष्ट करता है कि यात्रियों की सुविधा से समझौता किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं होगा।