
आरंग। रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र की ग्राम पंचायत दरबा में आबादी पट्टों के वितरण को लेकर शिकायत सामने आने के बाद पंचायत की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। ग्राम सभा में रखी गई शिकायत के मुताबिक, पंचायत में करीब 100 आबादी पट्टों के वितरण की बात बताई गई थी, लेकिन रिकॉर्ड में 345 पट्टे जारी किए जाने का दावा किया गया है। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि अतिरिक्त पट्टों में कुछ ऐसे लोगों के नाम भी शामिल हैं, जिन्हें नियमों के अनुसार पात्र नहीं माना जाना चाहिए था। इनमें तत्कालीन सरपंच के कथित रिश्तेदारों को पट्टा दिए जाने का आरोप भी लगाया गया है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। अब पूरे मामले में सरकारी दस्तावेजों की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा कि वास्तव में कितने पट्टे स्वीकृत हुए, कितने वितरित किए गए और लाभार्थियों की पात्रता क्या थी।
345 पट्टों के दस्तावेजों की जांच की मांग
शिकायतकर्ताओं ने रायपुर कलेक्टर को आवेदन देकर दरबा पंचायत में वितरित बताए जा रहे सभी 345 आबादी पट्टों की जांच कराने की मांग की है। आवेदन में लाभार्थियों की सूची के साथ पात्रता सूची, पंचायत प्रस्ताव, पंचनामा, संबंधित रजिस्टर, आदेश और अन्य मूल अभिलेखों को जांच के दायरे में लेने की मांग की गई है। शिकायत में यह भी कहा गया है कि प्रत्येक पट्टाधारी की पात्रता का नियमानुसार सत्यापन किया जाए और पंचायत स्तर पर दर्ज जानकारी का सरकारी रिकॉर्ड से मिलान कराया जाए।
सवाल सिर्फ संख्या का नहीं, प्रक्रिया का भी
मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि निर्धारित संख्या करीब 100 बताई गई थी तो 345 पट्टे किस प्रक्रिया के तहत जारी किए गए। शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि पट्टा वितरण में निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया और कुछ अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाया गया। यदि जांच में प्रक्रिया संबंधी अनियमितता या अपात्र व्यक्तियों को नियम विरुद्ध पट्टा देने की पुष्टि होती है, तो संबंधित अधिकारियों और जिम्मेदार लोगों की भूमिका भी जांच के दायरे में आ सकती है।
रिश्तेदारों को लाभ पहुंचाने के आरोप
शिकायत में तत्कालीन सरपंच रानी सनत पटेल के कार्यकाल के दौरान उनके कथित सगे-संबंधियों को भी आबादी पट्टे दिए जाने का आरोप लगाया गया है। हालांकि, यह आरोप सही है या नहीं, इसका निर्धारण संबंधित दस्तावेजों और लाभार्थियों की पात्रता की जांच के बाद ही किया जा सकेगा। शिकायतकर्ताओं ने मांग की है कि सभी पट्टाधारियों की पात्रता और उनके पंचायत से संबंधों की भी निष्पक्ष जांच कराई जाए।
जांच के बाद सामने आएगी असली तस्वीर
फिलहाल, मामला शिकायत और लगाए गए आरोपों तक सीमित है। अब प्रशासनिक जांच में पंचायत के रिकॉर्ड, पट्टा वितरण की प्रक्रिया और लाभार्थियों की पात्रता का मिलान किया जाता है तो यह स्पष्ट हो सकेगा कि 345 पट्टों का वितरण नियमों के तहत हुआ था या इसमें किसी स्तर पर अनियमितता हुई। शिकायतकर्ताओं ने कलेक्टर से निष्पक्ष और दस्तावेज आधारित जांच कराकर, यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो नियमों के अनुसार कार्रवाई की मांग की है।