नईदिल्ली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने टीवी पत्रकारिता की भाषा और उसकी सीमाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया है। जस्टिस मिलिंद जाधव ने  रिपब्लिक टीवी और उसके एडिटर अर्णब गोस्वामी को कड़ी फटकार लगाई। अदालत ने साफ शब्दों में कहा कि हद पार मत करो। खबरें दिखाओ और आलोचना करो लेकिन किसी की इज्जत सरेआम मिट्टी में मत मिलाओ। यह पूरा मामला उद्योगपति अनिल अंबानी की मानहानि याचिका से जुड़ा है जिस पर कोर्ट ने कड़ा रुख दिखाया है।

क्या है अनिल अंबानी का आरोप

अनिल अंबानी ने रिपब्लिक टीवी के खिलाफ मानहानि का केस दर्ज कराया है। अंबानी का आरोप है कि चैनल लगातार उन्हें प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी की जांच से जोड़कर भ्रामक खबरें दिखा रहा है। उनका कहना है कि इससे समाज में उनकी छवि खराब हो रही है। अदालत में दी गई याचिका में यह जानकारी दी गई है कि अंबानी नवंबर 2019 में ही रिलायंस कम्युनिकेशंस के नॉन एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर पद से इस्तीफा दे चुके हैं। इस्तीफा देने के कई साल बाद भी चैनल उन्हें बार बार ईडी के मामलों से जोड़ रहा है जो पूरी तरह गलत है।

अदालत में सुनवाई के दौरान क्या हुआ

सुनवाई के दौरान अंबानी के वकील मयूर खांडेपारकर ने अदालत के सामने कई अहम बातें रखीं। उन्होंने कोर्ट को बताया कि चैनल ने अपनी खबरों के प्रसारण के दौरान अंबानी के लिए कई आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल किया है। वकील के मुताबिक चैनल ने उन्हें फाइनेंशियल स्कैम का मास्टरमाइंड धोखेबाज मनी लॉन्डरर और फर्जी तक कहा।

इन दलीलों को सुनने के बाद जस्टिस मिलिंद जाधव ने चैनल को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सख्त लहजे में कहा कि अपनी भाषा पर काबू रखो। भड़काऊ और अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल बिल्कुल मत करो। कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि खबर दिखाना और किसी को जानबूझकर नीचा दिखाना दोनों एकदम अलग बातें हैं। अदालत ने यह भी साफ किया कि वह मीडिया की आजादी पर कोई रोक नहीं लगा रही है लेकिन मीडिया को अपनी मर्यादा और जिम्मेदारी समझनी होगी।

शशि थरूर केस का दिया हवाला

अदालत ने इस मामले में सख्त चेतावनी दी है। कोर्ट ने कहा कि अगर आगे से ऐसे मामले सामने आए तो बहुत कड़े आदेश जारी किए जाएंगे। जस्टिस जाधव ने साफ किया कि दिल्ली हाईकोर्ट में शशि थरूर से जुड़े मामले जैसी स्थिति वह अपनी अदालत में बिल्कुल बर्दाश्त नहीं करेंगे। कोर्ट ने चैनल की भाषा पर कड़ी नाराजगी जताई और इसे पूरी तरह अनुचित बताया।

चैनल ने अदालत में दी यह दलील

इस मामले में रिपब्लिक टीवी की तरफ से सीनियर वकील महेश जेठमलानी पेश हुए। उन्होंने अपने मुवक्किल का बचाव करते हुए दलील दी कि बाजार नियामक सेबी के आदेश में अनिल अंबानी का नाम दर्ज है। इसलिए सेबी के आदेश पर टिप्पणी करना फेयर कमेंट या निष्पक्ष टिप्पणी के दायरे में आता है।

हालांकि अदालत ने चैनल के इस तर्क को पूरी तरह नहीं माना। जज ने कहा कि निष्पक्ष टिप्पणी करने का अधिकार किसी भी व्यक्ति की निजी छवि खराब करने का लाइसेंस नहीं देता है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 16 अप्रैल को तय की गई है। अगली तारीख तक रिपब्लिक टीवी को अदालत में अपना औपचारिक जवाब दाखिल करना होगा।

इस पूरे विवाद का असर

यह मामला सिर्फ एक उद्योगपति और एक न्यूज़ चैनल के बीच का विवाद नहीं रह गया है। इस सुनवाई ने टीवी पत्रकारिता के सामने खड़े एक बड़े सवाल को उजागर कर दिया है। यह बहस फिर से शुरू हो गई है कि आक्रामक पत्रकारिता और जिम्मेदार रिपोर्टिंग के बीच की सीमा रेखा कहां तय होनी चाहिए। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इस सुनवाई के जरिए सभी मीडिया संस्थानों को एक साफ संदेश दे दिया है। अदालत का मानना है कि मीडिया पूरी तरह स्वतंत्र है और उसे आलोचना करने का पूरा अधिकार है लेकिन भाषा की गरिमा और तथ्यों का संतुलन बनाए रखना बहुत जरूरी है।