
रायपुर।खाद्य एवं औषधि प्रशासन विभाग के अधिकारियों की लेटलतीफी और लापरवाही के कारण राज्य में मिलावटी खाद्य पदार्थों पर लगाम कसने वाली व्यवस्था पूरी तरह से ठप पड़ गई है। भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई) के साथ हर साल होने वाले अनिवार्य अनुबंध को समय पर रिन्यू कराने में विभागीय अधिकारियों ने कोताही बरती। इसका नतीजा यह हुआ है कि प्रदेश के सभी 33 जिलों में चलने वाली मोबाइल फूड टेस्टिंग लैब (वैन) के पहिए थम गए हैं और ये गाड़ियां अब कबाड़ की तरह खड़ी कर दी गई हैं।
केंद्र सरकार की ओर से वर्ष 2020-21 में यह योजना शुरू की गई थी। इस मोबाइल यूनिट वैन को खरीदने से लेकर उसके संचालन तक का पूरा बजट केंद्र (एफएसएसएआई) से ही उपलब्ध कराया जाता है। नियम के अनुसार, इस योजना को निरंतर चालू रखने के लिए हर साल केंद्र सरकार के साथ एग्रीमेंट का नवीनीकरण करना जरूरी होता है। पिछले वर्षों में व्यवस्था यह थी कि विभागीय अधिकारी अनुबंध खत्म होने के तीन-चार महीने पहले ही पत्राचार और रिन्युअल की पूरी प्रक्रिया शुरू कर देते थे, जिससे वैन का संचालन कभी प्रभावित नहीं हुआ। लेकिन, इस बार अधिकारियों ने समय रहते फाइलों को आगे नहीं बढ़ाया। अनुबंध की अवधि समाप्त हो गई और 33 जिलों में ऑन द स्पॉट जांच की सुविधा बंद हो गई।
फील्ड की कार्रवाई पर लगा ब्रेक, लैब रिपोर्ट के लिए महीनों का इंतजार
मोबाइल फूड टेस्टिंग यूनिट के बंद होने का सबसे ज्यादा बुरा असर विभाग की फील्ड कार्रवाई पर पड़ा है। वर्तमान स्थिति यह है कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को बाजारों से सैंपल लेकर उन्हें राज्य की प्रयोगशाला में जांच के लिए भेजना पड़ रहा है। वहां से रिपोर्ट आने में एक-एक महीने तक का समय लग जाता है। पहले मोबाइल लैब के जरिए गांव, कस्बे, हाट-बाजारों और मेलों में मौके पर ही प्राथमिक परीक्षण हो जाता था। इससे मिलावटी सामान बेचने वालों में कार्रवाई का खौफ बना रहता था। अब वैन बंद होने से त्वरित कार्रवाई वाली यह पूरी व्यवस्था ध्वस्त हो गई है।
स्टाफ बैठा खाली, इन चीजों की जांच रुकी
योजना बंद होने से वैन में तैनात अमला भी बेकार बैठ गया है। हर मोबाइल वैन में एक वाहन चालक, एक तकनीशियन और एक सहायक सहित तीन सदस्यीय टीम तैनात रहती थी। यह टीम जिले-जिले जाकर मिनटों में खाद्य पदार्थों की जांच कर लेती थी।
दूध: यूरिया की मिलावट तो नहीं की गई है।
मिठाई:उपयोग किए गए रंग हानिकारक तो नहीं हैं।
मसाले: मसालों में रंग या डस्ट तो नहीं मिलाया गया है।
भोजन:खाने में इस्तेमाल होने वाला तेल हानिकारक तो नहीं है।
अब जब उच्च स्तर से इस मामले में पूछताछ शुरू हुई है, तो विभागीय अधिकारी अपनी सफाई पेश कर रहे हैं। खाद्य नियंत्रक दीपक अग्रवाल का कहना है कि तकनीकी कारणों से प्रक्रिया में देरी हुई है। केंद्र से अनुबंध के बिना संचालन नहीं किया जा सकता। एफएसएसएआई को प्रस्ताव भेजकर रिन्युअल की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जल्द ही वैन का संचालन फिर से चालू करवा दिया जाएगा।