
गुवाहाटी। असम की जेलों में बंद कैदियों की HIV स्क्रीनिंग के दौरान बड़ी संख्या में पॉजिटिव मामले सामने आने के बाद राज्य सरकार ने मामले को गंभीरता से लिया है। राज्य की 31 जेलों में किए गए परीक्षण के दौरान 226 कैदियों के HIV पॉजिटिव पाए जाने की जानकारी सामने आई है। मामले पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा है कि सरकार पूरे मामले की विस्तार से जांच करेगी। जांच का उद्देश्य यह समझना है कि संक्रमण से जुड़े मामले किन परिस्थितियों में सामने आए और जेलों में संक्रमित कैदियों को जरूरी चिकित्सा सुविधा किस तरह सुनिश्चित की जाए।
31 जेलों में हुई HIV स्क्रीनिंग
सरकारी सूत्रों के अनुसार, राज्य की 31 जेलों में बंद कैदियों की HIV स्क्रीनिंग की गई। जांच में कुल 226 कैदी HIV पॉजिटिव पाए गए। इनमें से 202 कैदियों को एंटीरेट्रोवायरल थेरेपी (ART) दी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और जेल प्रशासन संक्रमित कैदियों के उपचार और मेडिकल निगरानी पर काम कर रहे हैं।सरकार का जोर यह सुनिश्चित करने पर है कि जिन कैदियों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई है, उन्हें समय पर उपचार और आवश्यक स्वास्थ्य सेवाएं मिलती रहें।
CM हिमंता ने कहा- मामले की होगी गहराई से जांच
कैदियों में HIV पॉजिटिव मामलों की रिपोर्ट पर मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने कहा कि सरकार इस मामले को गंभीरता से ले रही है। मुख्यमंत्री के अनुसार, पूरे मामले की जांच कर यह समझने की कोशिश की जाएगी कि संबंधित व्यक्ति को संक्रमण किन परिस्थितियों में हुआ। साथ ही उन्होंने प्रभावित लोगों को आवश्यक मेडिकल केयर और इलाज उपलब्ध कराने की बात कही। उन्होंने यह भी बताया कि मामले पर न्यायिक स्तर पर भी संज्ञान लिए जाने की जानकारी है।
श्रीभूमि जेल में भी सामने आए 11 मामले
असम की श्रीभूमि जिला जेल में भी HIV पॉजिटिव कैदियों की संख्या सामने आने के बाद चिंता बढ़ी है। जेल अधिकारियों के अनुसार, यहां करीब 445 कैदी बंद हैं, जिनमें 11 कैदियों की HIV रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। इनमें एक महिला कैदी के शामिल होने की जानकारी दी गई है। अधिकारियों के मुताबिक, पॉजिटिव पाए गए कई कैदी NDPS से जुड़े मामलों में जेल में बंद हैं।
संक्रमित कैदियों को ART की सुविधा
HIV पॉजिटिव कैदियों के इलाज के लिए स्वास्थ्य विभाग और एड्स कंट्रोल से जुड़े अधिकारी जेलों में नियमित रूप से सेवाएं उपलब्ध करा रहे हैं। जिन कैदियों को ART की आवश्यकता है, उन्हें निर्धारित उपचार दिया जा रहा है। स्वास्थ्य अधिकारियों की टीम जरूरत के मुताबिक जेलों में जाकर दवाएं, मेडिकल सेवाएं और काउंसलिंग उपलब्ध करा रही है।
जेल से ART सेंटर ले जाना चुनौती
जेलों में इलाज के दौरान सुरक्षा व्यवस्था भी एक बड़ी चुनौती है। कुछ मामलों में कैदियों को जेल से बाहर स्थित ART सेंटर तक ले जाना सुरक्षा कारणों से मुश्किल होता है। ऐसी स्थिति में स्वास्थ्य विभाग की टीमें खुद जेलों में पहुंचकर आवश्यक चिकित्सा सेवाएं उपलब्ध करा रही हैं, ताकि उपचार में किसी तरह की रुकावट न आए।
जरूरत पड़ने पर मेडिकल कॉलेज भेजे जाते हैं कैदी
जेल अधिकारियों के मुताबिक, जिन विचाराधीन कैदियों को बेहतर या विशेषज्ञ उपचार की आवश्यकता होती है, उन्हें जरूरत के अनुसार सिलचर मेडिकल कॉलेज भेजा जाता है। जेल प्रशासन का कहना है कि HIV पॉजिटिव कैदियों को उपचार के साथ जरूरी काउंसलिंग भी उपलब्ध कराई जा रही है।
असम में करीब 33 हजार सक्रिय HIV/AIDS मरीज
इससे पहले असम के स्वास्थ्य मंत्री अशोक सिंघल ने राज्य में लगभग 33,000 सक्रिय HIV/AIDS मरीज होने की जानकारी दी थी। जेलों में सामने आए मामलों के बाद अब स्वास्थ्य और जेल प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि संक्रमित कैदियों को नियमित उपचार के साथ-साथ आवश्यक मेडिकल निगरानी भी लगातार मिलती रहे।
HIV पॉजिटिव होना इलाज से बाहर होने का मतलब नहीं
HIV की पुष्टि होने के बाद नियमित ART और चिकित्सकीय देखभाल से संक्रमित व्यक्ति लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जी सकता है। इसलिए जेलों में पॉजिटिव पाए गए कैदियों के लिए समय पर जांच, उपचार और काउंसलिंग बेहद महत्वपूर्ण है। फिलहाल असम सरकार ने मामले की विस्तृत जांच के संकेत दिए हैं। अब जांच से यह स्पष्ट होगा कि जेलों में सामने आए इन मामलों से जुड़े स्वास्थ्य जोखिम क्या हैं और भविष्य में संक्रमण की रोकथाम के लिए क्या अतिरिक्त कदम उठाए जाएंगे।