बीजापुर: छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले के भैरमगढ़ में नाबालिग से कथित सामूहिक दुष्कर्म की घटना ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है। 11 अप्रैल की रात हुई इस वारदात में सामने आए मुख्य आरोपी अंकित प्रभुलीया के सत्तारूढ़ दल से जुड़े एक स्थानीय नेता का करीबी होने के आरोपों को लेकर विपक्ष ने सरकार पर सीधा हमला बोला है। मामला सामने आते ही क्षेत्र में आक्रोश फैल गया है और कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं।

जांच में यह भी सामने आया है कि प्रमुख आरोपी कथित रूप से भाजपा से जुड़े एक प्रभावशाली व्यक्ति के संपर्क में था। इस खुलासे के बाद विपक्ष ने सरकार पर संरक्षण देने के आरोप तेज कर दिए हैं। साथ ही, निष्पक्ष जांच को लेकर शंकाएं भी उठ रही हैं और यह बहस तेज हो गई है कि क्या राजनीतिक पहुंच कानून की कार्रवाई को प्रभावित कर सकती है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी समेत अन्य विपक्षी दलों ने इस घटना को बड़ा मुद्दा बनाते हुए राज्य सरकार की आलोचना की है। पार्टी नेताओं का कहना है कि आदिवासी क्षेत्रों में महिलाओं की सुरक्षा लगातार कमजोर हो रही है और गंभीर अपराधों में भी समय पर सख्त कार्रवाई नहीं हो रही। उनका आरोप है कि ऐसे मामलों में राजनीतिक दबाव जांच की दिशा प्रभावित कर सकता है, जिससे न्याय प्रक्रिया पर सवाल खड़े होते हैं।

घटना के बाद सरकार की कार्यप्रणाली और कानून-व्यवस्था पर व्यापक सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय संगठनों और नागरिकों ने निष्पक्ष जांच, फास्ट ट्रैक सुनवाई और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। यह मामला अब केवल एक आपराधिक घटना तक सीमित नहीं रहा, बल्कि राज्य में महिला सुरक्षा और प्रशासनिक जवाबदेही की एक बड़ी परीक्षा बन गया है।