
रायपुर। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस की राजनीति अक्सर गुटबाजी की खबरों के इर्द-गिर्द घूमती नजर आती है। लेकिन इन दिनों प्रदेश की सियासत में एक ऐसी तस्वीर चर्चा का विषय बनी हुई है, जिसके कई तरह के राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं। मामला पार्टी के दो सबसे बड़े दिग्गज नेताओं की मुलाकात का है। पूर्व सीएम भूपेश बघेल के बेटे चैतन्य (बिट्टू) के जन्मदिन के मौके पर टीएस सिंहदेव अचानक उनके भिलाई स्थित आवास पर पहुंचे। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच काफी लंबी चर्चा हुई, जिसने प्रदेश की राजनीति में नई अटकलों को जन्म दे दिया है।
क्या खत्म हो रही है दोनों दिग्गजों की दूरी?
भूपेश बघेल और टीएस सिंहदेव की इस मुलाकात के बाद यह दावा किया जा रहा है कि दोनों नेताओं के बीच लंबे समय से चली आ रही अदावत और दूरियां अब कम होने लगी हैं। इस मुलाकात का मुख्य मकसद आम जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं को यह मैसेज देना है कि कांग्रेस में अब किसी तरह की गुटबाजी नहीं बची है और पार्टी सदन से लेकर सड़क तक पूरी तरह एकजुट है।
इस मुलाकात की जानकारी खुद भूपेश बघेल ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर साझा की। उन्होंने तस्वीरें शेयर करते हुए लिखा- "बेटे चैतन्य (बिट्टू) के जन्मदिन पर भिलाई निवास पर बधाई देने आदरणीय महाराज साहब टीएस सिंहदेव जी और कांग्रेस के साथियों का आगमन हुआ। एक अग्रज की तरह बाबा साहब का स्नेह सदैव परिवार को मिलता रहा है। हम सबको अच्छा लगा।"
प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी और सिंहदेव की पहल
इस मेल-मिलाप के पीछे एक बड़ा राजनीतिक एंगल प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी को माना जा रहा है। मौजूदा पीसीसी चीफ दीपक बैज का तीन साल का कार्यकाल पूरा हो चुका है। बैज का कार्यकाल पूरा होने के बाद राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा तेज है कि कांग्रेस पार्टी जल्द ही कोई बड़ा बदलाव कर सकती है। अटकलें लगाई जा रही हैं कि पार्टी आलाकमान टीएस सिंहदेव को नया प्रदेश अध्यक्ष बना सकता है। फिलहाल संगठन में सिंहदेव के पास कोई पद नहीं है। ऐसे में उनकी तरफ से की गई इस मुलाकात को पुरानी अदावत दूर करने की एक सोची-समझी राजनीतिक पहल माना जा रहा है।
टीएस सिंहदेव की राजनीति का अपना एक अलग तरीका है। सियासत में उनकी छवि एक जेंटलमैन नेता की रही है, जो किसी भी मुद्दे पर अपनी बेबाक राय रखने से पीछे नहीं हटते।
राहुल गांधी के दौरे के बाद बदली रणनीति
छत्तीसगढ़ कांग्रेस की रणनीति में हाल ही में एक और बदलाव देखने को मिला है। यह बदलाव है पार्टी की आक्रामक राजनीति। राहुल गांधी के छत्तीसगढ़ दौरे के बाद कांग्रेस हर मोर्चे पर एकजुट नजर आ रही है। चाहे विधानसभा के मानसून सत्र में आपसी सहमति से सरकार के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव हो, या फिर नकटी गांव में अतिक्रमण का मामला, कांग्रेस के सभी बड़े नेता सरकार के खिलाफ आक्रामक रुख अपनाए हुए हैं।
पार्टी के भीतर एकजुटता दिखाने की कवायद लगातार चल रही है। पिछले दिनों फूलो देवी नेताम ने भी कांग्रेस नेताओं को डिनर दिया था। इन सभी घटनाक्रमों को देखकर यही लगता है कि कांग्रेस अब पुराने विवादों को भुलाकर नए सिरे से अपनी सियासी जमीन मजबूत करने में जुट गई है।