
गरियाबंद। विकास के दावों के बीच गरियाबंद के मैनपुर ब्लॉक से सड़क की बदहाली की ऐसी तस्वीर सामने आई है, जिसने व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। करीब 68 लाख रुपये की लागत से बनी प्रधानमंत्री ग्राम सड़क जगह-जगह बड़े गड्ढों में तब्दील हो गई है। नाराज ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान खींचने के लिए अनोखा तरीका अपनाया और सड़क के गड्ढों में धान के साथ बेशरम के पौधे रोपकर विरोध दर्ज कराया।
पहले रैली, फिर सड़क पर अनोखा विरोध
ग्राम गौरघाट, देहारगुड़ा, खामभाठा, गिरहोला, अचानपुर, सिंहार और रामपारा समेत आसपास के गांवों के सैकड़ों ग्रामीण दोपहर करीब 12 बजे सड़क पर जुटे। ग्रामीणों ने बदहाल मार्ग को लेकर रैली निकाली और शासन-प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। इसके बाद गड्ढों में धान और बेशरम के पौधे लगाकर अपना आक्रोश जताया।
ग्रामीणों का कहना है कि सड़क का निर्माण कार्य वर्ष 2018 में शुरू हुआ था और करीब तीन साल में इसे पूरा किया गया। लेकिन सड़क बनने के कुछ ही समय बाद जगह-जगह इसकी परत उखड़ने लगी और बड़े-बड़े गड्ढे बन गए। उनका आरोप है कि शुरुआती दौर में शिकायत करने पर विभागीय अधिकारियों ने मरम्मत का भरोसा दिया, लेकिन समस्या जस की तस बनी रही।
‘सड़क की गारंटी खत्म हो गई’ कहकर लौट रहे अधिकारी?
ग्रामीणों के मुताबिक, जब उन्होंने सड़क की खराब हालत को लेकर अधिकारियों से दोबारा शिकायत की तो उन्हें सड़क की पांच साल की गारंटी अवधि का हवाला दिया गया। ग्रामीणों का सवाल है कि अगर सड़क निर्माण के पहले ही साल से टूटने लगी थी, तो समय रहते इसकी गुणवत्ता की जांच और मरम्मत क्यों नहीं कराई गई? ग्रामीणों ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच कराने और सड़क का नए सिरे से सुधार कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यह मार्ग केवल गांवों को जोड़ने वाला रास्ता नहीं, बल्कि स्कूली बच्चों और रोजमर्रा के आवागमन का प्रमुख जरिया है।
एक दर्जन से ज्यादा स्कूल, रोज गुजरते हैं हजारों बच्चे
बदहाल सड़क का सबसे ज्यादा असर स्कूली बच्चों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों के अनुसार इस मार्ग पर एक दर्जन से अधिक स्कूल हैं, जहां आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में बच्चे पहुंचते हैं। गड्ढों और खराब सड़क के कारण आए दिन हादसे का खतरा बना रहता है। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सड़क की मरम्मत और गुणवत्ता की जांच नहीं कराई गई तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। जरूरत पड़ने पर चक्का जाम करने की चेतावनी भी दी गई है।
सड़क में गड्ढे या गड्ढों में सड़क?
ग्रामीणों का धान और बेशरम रोपने का प्रदर्शन अब क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। प्रदर्शन के जरिए उन्होंने यह संदेश देने की कोशिश की कि जिस सड़क से लोगों को सफर करना था, उसकी हालत ऐसी हो गई है कि अब उसमें खेती की जा सकती है। हालांकि, सड़क की खराब गुणवत्ता के ग्रामीणों के आरोपों की आधिकारिक पुष्टि विभागीय जांच के बाद ही स्पष्ट होगी।