
बिलासपुर : पाटन विधानसभा चुनाव को लेकर पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की ओर से दायर की गई आपत्ति को छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने खारिज कर दिया है। भाजपा प्रत्याशी विजय बघेल की ओर से दाखिल चुनाव याचिका को शुरुआत में ही खत्म करने की मांग करते हुए भूपेश बघेल ने कानूनी प्रावधानों का हवाला दिया था। गुरुवार को जस्टिस रविंद्र कुमार अग्रवाल की कोर्ट ने इस आवेदन पर फैसला सुनाते हुए उसे स्वीकार नहीं किया। इसके साथ ही अब पाटन चुनाव से जुड़ी मूल याचिका में आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया है।
विजय बघेल ने चुनाव परिणाम को चुनौती देते हुए भूपेश बघेल पर चुनाव के दौरान आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है। इसी मामले में दायर चुनाव याचिका पर सुनवाई चल रही है। भूपेश बघेल की ओर से दलील दी गई थी कि याचिका को कानूनी आधार के अभाव में प्रारंभिक स्तर पर ही समाप्त किया जाना चाहिए। इसके लिए सिविल प्रक्रिया संहिता के आदेश 7 नियम 11 के साथ लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 86(1) का उल्लेख किया गया था।
10 सितंबर को रुक गई थी गवाही
मामले में 10 सितंबर को विजय बघेल और उनके गवाह सौरभ दुबे के बयान दर्ज होने थे। दोनों निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार हाई कोर्ट पहुंचे भी थे। हालांकि, इससे एक दिन पहले भूपेश बघेल की ओर से दाखिल आवेदन के चलते उस दिन साक्ष्य दर्ज करने की प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी। 18 अगस्त को दोनों पक्षों के अधिवक्ताओं की मौजूदगी में 10 सितंबर की तारीख गवाही के लिए तय की गई थी। सुनवाई शुरू होने पर भूपेश बघेल की ओर से उनके अधिवक्ता ने 9 सितंबर को दाखिल किए गए आवेदन की जानकारी कोर्ट को दी। चुनाव याचिकाकर्ता की ओर से भी उसी दिन आवेदन का जवाब पेश कर दिया गया। दोनों पक्षों की सहमति से कोर्ट ने इसी आवेदन पर तत्काल सुनवाई की।
दोनों पक्षों ने रखी अपनी-अपनी दलील
भूपेश बघेल की ओर से अधिवक्ता मयंक जैन वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। उनके साथ अन्य अधिवक्ताओं ने भी पक्ष रखा। वहीं विजय बघेल की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता टी के झा समेत अन्य वकीलों ने कोर्ट के समक्ष अपना पक्ष रखा। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हाई कोर्ट ने आदेश सुरक्षित रखते हुए 17 सितंबर को फैसला सुनाने की तारीख तय की थी। गुरुवार को कोर्ट ने आवेदन खारिज कर दिया।
अब साफ़ हुआ रास्ता, दर्ज होंगे याचिकाकर्ता के साक्ष्य
भूपेश बघेल का आवेदन खारिज होने के बाद चुनाव याचिका की सुनवाई अब मूल मुद्दों पर आगे बढ़ेगी। विजय बघेल और उनके गवाहों के साक्ष्य दर्ज किए जाने की प्रक्रिया भी आगे शुरू हो सकेगी। इसके बाद मामले में दोनों पक्षों के साक्ष्य और दलीलों के आधार पर सुनवाई आगे बढ़ेगी।
आदेश 7 नियम 11 के तहत किसी याचिका या वाद को प्रारंभिक स्तर पर खारिज करने की मांग की जा सकती है। इस प्रावधान का इस्तेमाल सामान्यतः तब किया जाता है, जब प्रतिवादी का दावा हो कि याचिका में कानूनी रूप से आगे बढ़ने का आधार नहीं है या वह निर्धारित कानूनी शर्तो को पूरा नही करती। इस मामले में हाई कोर्ट ने भूपेश बघेल की ओर से उठाई गई प्रारंभिक आपत्ति को स्वीकार नहीं किया है।