रायपुर में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन पर बैठक, शुल्क में बदलाव की तैयारी
रायपुर में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन को लेकर शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता संभागायुक्त महादेव कावरे ने की। इसमें रायपुर संभाग के सभी कलेक्टर, सीएमएचओ, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के पदाधिकारी और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी शामिल हुए। बैठक में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन की स्थिति और भविष्य की योजना पर चर्चा की गई।

आखिर क्या है घटना
बैठक में बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन की वर्तमान व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर दिया गया। साल 2022 से अस्पतालों से प्रति बेड के हिसाब से शुल्क लिया जा रहा है। हर साल इसमें 7.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है। इस समय रायपुर संभाग में लगभग 1600 अस्पताल और क्लिनिक हैं, जिनका बायोमेडिकल वेस्ट सिलतरा स्थित यूनिट में वैज्ञानिक तरीके से निपटाया जाता है।
घटना कैसे हुई
बैठक में अधिकारियों ने सुझाव दिया कि शुल्क को प्रति बेड के बजाय कचरे के असली वजन के आधार पर लगाया जाए। इस पर संभागायुक्त महादेव कावरे ने सभी सुझावों पर ध्यान देते हुए कार्रवाई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बायोमेडिकल वेस्ट का सुरक्षित निपटान जनस्वास्थ्य और पर्यावरण के लिए आवश्यक है।
घटना कब और कहां हुआ
यह बैठक रायपुर में शुक्रवार को हुई, जिसमें विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लिया। बैठक का उद्देश्य बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था को और मजबूत करना था।
घटना का जिम्मेदार कौन
बैठक में शामिल अधिकारियों में आईएमए के राज्य अध्यक्ष डॉ. अनूप वर्मा और प्रदूषण नियंत्रण मंडल के अधिकारी शामिल थे। डॉ. अनूप वर्मा ने सुझाव दिया कि एनओसी प्रक्रिया को आसान बनाना चाहिए और दूरदराज के अस्पतालों का जल्दी पंजीकरण किया जाना चाहिए।
प्रशासन की प्रतिक्रिया
संभागायुक्त महादेव कावरे ने कहा कि सभी विभागों को मिलकर काम करना होगा। जिन संस्थानों का पंजीकरण बाकी है, उन्हें जल्द पूरा करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने यह भी कहा कि जिन संस्थानों से बायोमेडिकल वेस्ट नहीं निकलता, उन्हें अलग किया जाना चाहिए।
स्थानीय लोगों की बात
स्थानीय लोगों का कहना है कि बायोमेडिकल वेस्ट प्रबंधन की व्यवस्था में सुधार होना आवश्यक है। एक स्थानीय निवासी ने कहा कि "अस्पतालों से निकलने वाले वेस्ट का सही तरीके से निपटान होना चाहिए, ताकि स्वास्थ्य पर कोई खतरा न हो।"
