चंडीगढ़: पंजाब के उद्योग मंत्री Sanjeev Arora को प्रवर्तन निदेशालय (ED) की हिरासत के बीच अदालत से बड़ी राहत मिली है। गुरुग्राम स्थित पीएमएलए कोर्ट ने उन्हें अपनी पसंद का वकील चुनने और कानूनी दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करने की अनुमति दे दी है। कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि जांच एजेंसी मंत्री को वकालतनामा पर हस्ताक्षर करने से नहीं रोक सकती और उनके संवैधानिक अधिकारों का पूरा सम्मान किया जाना चाहिए। इस फैसले के बाद मामले ने कानूनी और राजनीतिक दोनों स्तरों पर नया मोड़ ले लिया है।

मामले की सुनवाई विशेष पीएमएलए न्यायाधीश नरेंद्र सूरा की अदालत में हुई, जहां ईडी की ओर से पेश विशेष लोक अभियोजक ने भी मंत्री की मांग पर कोई आपत्ति नहीं जताई। अदालत ने आदेश जारी करते हुए कहा कि जांच अधिकारी तुरंत दस्तावेज सत्यापित कर उन्हें उनके वकील या परिवार तक पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी करें। इसके साथ ही कोर्ट ने ईडी हिरासत के दौरान रोजाना सुबह एक घंटे तक वकील से मुलाकात की भी अनुमति दे दी है।

दरअसल, ईडी ने संजीव अरोड़ा को करीब 100 करोड़ रुपये के कथित मनी लॉन्ड्रिंग और फर्जी GST बिलिंग मामले में गिरफ्तार किया है। जांच एजेंसी का आरोप है कि कई फर्जी कंपनियों और संदिग्ध कारोबारी नेटवर्क के जरिए करोड़ों रुपये के लेनदेन किए गए। इसी सिलसिले में दिल्ली, गुरुग्राम और चंडीगढ़ समेत कई शहरों में छापेमारी की गई थी। ईडी का दावा है कि मामले में कई शेल कंपनियों और फर्जी इनवॉइसिंग का इस्तेमाल किया गया।

अदालत ने यह भी निर्देश दिया है कि हिरासत के दौरान मंत्री को मेडिकल अधिकारियों द्वारा सुझाई गई सभी सुविधाएं, दवाइयां और जरूरी चिकित्सा सहायता उपलब्ध कराई जाए। अब ईडी रिमांड खत्म होने के बाद 16 मई को संजीव अरोड़ा को दोबारा अदालत में पेश किया जाएगा। राजनीतिक गलियारों में इस गिरफ्तारी और कोर्ट से मिली राहत को लेकर चर्चाएं तेज हैं, जबकि जांच एजेंसियां पूरे वित्तीय नेटवर्क की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।