
चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में ‘सनातन’ विवाद एक बार फिर सुर्खियों में आ गया है। डीएमके नेता और विपक्ष के प्रमुख चेहरों में शामिल Udhayanidhi Stalin ने विधानसभा के भीतर अपने पुराने बयान को दोहराते हुए कहा कि “सनातन समाज को बांटता है और इसे समाप्त किया जाना चाहिए।” खास बात यह रही कि जब उदयनिधि यह बयान दे रहे थे, उस दौरान सदन में मुख्यमंत्री C. Joseph Vijay भी मौजूद थे। बयान सामने आने के बाद राज्य की राजनीति में एक बार फिर वैचारिक और राजनीतिक बहस तेज हो गई है।
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि ने राजनीतिक मतभेदों के बावजूद तमिलनाडु के विकास के लिए एकजुट होकर काम करने की बात भी कही। उन्होंने मुख्यमंत्री विजय के साथ पुराने शैक्षणिक संबंधों का जिक्र करते हुए कहा कि विपक्ष सरकार को रचनात्मक सुझाव देने के लिए तैयार है और सरकार को भी उन्हें सकारात्मक रूप से लेना चाहिए। हालांकि, उनके ‘सनातन’ वाले बयान ने पूरे संबोधन को राजनीतिक रूप से बेहद संवेदनशील बना दिया। भाजपा और कई हिंदू संगठनों ने पहले भी इस तरह की टिप्पणियों पर तीखी प्रतिक्रिया दी थी।
उदयनिधि स्टालिन ने शपथ ग्रहण समारोह में ‘वंदे मातरम्’ और तमिलनाडु के राज्य गीत के क्रम को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की परंपरा के अनुसार सरकारी कार्यक्रमों की शुरुआत राज्य गीत से होनी चाहिए और उसे किसी भी स्थिति में पीछे नहीं रखा जाना चाहिए। उन्होंने पश्चिम बंगाल के शपथ समारोह का उदाहरण देते हुए कहा कि तमिल पहचान और सांस्कृतिक सम्मान से जुड़े मुद्दों पर सरकार को बेहद संवेदनशील रहना चाहिए।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि तमिलनाडु में नई सरकार बनने के बाद अब वैचारिक टकराव खुलकर सामने आने लगा है। एक तरफ सरकार विकास और प्रशासनिक स्थिरता का संदेश देने की कोशिश कर रही है, वहीं विपक्ष सांस्कृतिक और राजनीतिक मुद्दों के जरिए दबाव बनाने में जुटा है। आने वाले दिनों में ‘सनातन’, भाषा और क्षेत्रीय पहचान जैसे मुद्दे तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बहस का केंद्र बन सकते हैं।