
रायपुर: राजधानी रायपुर में भीषण गर्मी के बीच पानी सप्लाई के लिए जारी नगर निगम के टैंकर टेंडर पर अब बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने टैंकर संचालन से जुड़े टेंडर में भारी अनियमितता और अधिकारियों-ठेकेदारों की मिलीभगत का आरोप लगाया है। उनका दावा है कि वर्षों से एक ही समूह की फर्मों को लगातार काम दिया जा रहा है, जिससे पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े हो गए हैं। मामले को लेकर निगम प्रशासन और विपक्ष आमने-सामने आ गए हैं।
आकाश तिवारी ने आरोप लगाया कि रायपुर नगर निगम हर साल वार्डों में पानी सप्लाई के लिए टैंकर टेंडर जारी करता है, लेकिन चयन प्रक्रिया हमेशा कुछ चुनिंदा ठेकेदारों तक सीमित रहती है। उन्होंने कहा कि पिछले वर्ष जिन छह फर्मों को काम दिया गया था, इस बार भी उन्हीं कंपनियों को ठेका सौंपा गया है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर हर बार वही फर्में कैसे पात्र घोषित हो जाती हैं और क्या टेंडर की शर्तें पहले से तय सिंडिकेट के हिसाब से बनाई जा रही हैं।
नेता प्रतिपक्ष ने यह भी दावा किया कि निविदा प्रक्रिया में कई संदिग्ध तथ्य सामने आए हैं। उनके अनुसार, अलग-अलग फर्मों द्वारा जमा किए गए रेट और दस्तावेजों की तारीखों में समानता दिखाई दे रही है, जिससे मिलीभगत की आशंका और मजबूत हो जाती है। उन्होंने आरोप लगाया कि निगम प्रशासन टेंडर राशि कम दर्शाता है, लेकिन बाद में अतिरिक्त भुगतान के जरिए खर्च कई गुना बढ़ा दिया जाता है। पिछले वर्ष करीब 1 करोड़ रुपए के टेंडर के मुकाबले 2 करोड़ से अधिक का भुगतान किया जाना इसी दिशा में बड़ा सवाल खड़ा करता है।
टैंकर संचालन की मॉनिटरिंग को लेकर भी विपक्ष ने नगर निगम को घेरा है। आकाश तिवारी ने कहा कि वर्षों से टैंकरों में GPS सिस्टम लगाने की बात कही जा रही है, लेकिन जमीनी स्तर पर यह व्यवस्था लागू नहीं हुई। बिना GPS ट्रैकिंग के यह पता लगाना मुश्किल है कि टैंकर वास्तव में किस वार्ड में पहुंचे और कितनी मात्रा में पानी सप्लाई किया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि मॉनिटरिंग सिस्टम की कमी भ्रष्टाचार और फर्जी बिलिंग को बढ़ावा दे रही है।
नेता प्रतिपक्ष ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि यदि टेंडर प्रक्रिया में अनियमितता और अधिकारियों-ठेकेदारों की सांठगांठ साबित होती है, तो जिम्मेदार लोगों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि राजधानी में पानी जैसी बुनियादी जरूरत से जुड़े कामों में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है। अब इस मुद्दे ने राजनीतिक रंग भी पकड़ लिया है और आने वाले दिनों में निगम प्रशासन पर जवाब देने का दबाव बढ़ सकता है।