कवर्धा। छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले की बेटी गीता यादव ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मंच पर प्रदेश का नाम रोशन किया है। बोड़ला की रहने वाली गीता भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम का हिस्सा रहीं, जिसने मेजबान चीन को उसके ही घर में 1-0 से शिकस्त देकर विमेंस जूनियर एशिया कप 2026 की ट्रॉफी अपने नाम कर ली। इस जीत के साथ भारत ने जूनियर एशिया कप में लगातार तीसरी बार चैंपियन बनने का गौरव हासिल किया।

चीन के खिलाफ फाइनल में भारत का शानदार डिफेंस
हुलुनबुइर के मोकी ट्रेनिंग बेस में खेले गए खिताबी मुकाबले में भारत और चीन के बीच शुरुआत से ही कड़ी टक्कर देखने को मिली। दोनों टीमों ने आक्रमण की कोशिश की, लेकिन भारतीय खिलाड़ियों ने गेंद पर बेहतर नियंत्रण के साथ डिफेंस को भी मजबूत बनाए रखा।

मैच के 17वें मिनट में सानिका चंद्रकांती माने ने शानदार फील्ड गोल दागकर भारत को 1-0 की बढ़त दिलाई। इसके बाद चीन ने बराबरी की पूरी कोशिश की, लेकिन भारतीय डिफेंस ने हर हमले को नाकाम करते हुए बढ़त कायम रखी। अंतिम सीटी बजते ही भारतीय खिलाड़ियों ने जीत का जश्न मनाया और एशिया कप एक बार फिर भारत के नाम हो गया।

गीता ने पूरे टूर्नामेंट में छोड़ी अपनी छाप
इस खिताबी सफर में कबीरधाम की गीता यादव का प्रदर्शन भी चर्चा में रहा। बोड़ला के वार्ड नंबर-14 से आने वाली गीता ने पूरे टूर्नामेंट में टीम के लिए महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके प्रदर्शन को पिछले मुकाबले में भी पहचान मिली थी, जब उन्हें ‘प्लेयर ऑफ द मैच’ चुना गया। फाइनल मुकाबले में भी गीता ने टीम के खेल में अहम योगदान दिया। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर रही गीता ने भारतीय जूनियर टीम में अपनी जगह को और मजबूत किया है।

बिना कोई मैच गंवाए भारत ने जीती ट्रॉफी
भारतीय टीम का अभियान फाइनल तक शानदार रहा। ग्रुप स्टेज में टीम ने तीन मुकाबलों में जीत हासिल की, जबकि एक मैच ड्रॉ रहा। इसके बाद टीम ने नॉकआउट चरण में भी अपना दबदबा बनाए रखा और फाइनल में चीन को हराकर पूरे टूर्नामेंट में अजेय रहते हुए खिताब पर कब्जा किया। भारत इससे पहले 2023 और 2024 में भी जूनियर एशिया कप का चैंपियन रह चुका है। लगातार तीसरी ट्रॉफी जीतकर भारतीय जूनियर महिला हॉकी टीम ने खिताबों की हैट्रिक पूरी कर दी।

बोड़ला से अंतरराष्ट्रीय हॉकी तक गीता का सफर
गीता यादव की उपलब्धि सिर्फ एक खिलाड़ी की व्यक्तिगत सफलता नहीं है, बल्कि कबीरधाम के लिए भी गर्व का मौका है। बोड़ला की एक बेटी ने अंतरराष्ट्रीय हॉकी के मैदान पर देश की जीत में योगदान देकर पूरे क्षेत्र को गौरवान्वित किया है।

गीता की इस सफलता के बाद स्थानीय खेल प्रेमियों और उनके क्षेत्र में खुशी का माहौल है। उनकी उपलब्धि उन युवाओं के लिए भी प्रेरणा बन सकती है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद खेल के मैदान में बड़ा मुकाम हासिल करने का सपना देखते हैं।