बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में लगातार बढ़ते सड़क हादसों को लेकर छत्तीसगढ़ हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, पुलिस प्रशासन और संबंधित एजेंसियों के रवैये पर कड़ी नाराजगी जताई है। सुनवाई के दौरान अदालत ने सड़कों पर खुले घूम रहे मवेशियों और अवैध पार्किंग को दुर्घटनाओं की बड़ी वजह बताते हुए तीखी टिप्पणी की और पूछा, "क्या पुलिस सिर्फ गाय हांकने के लिए है?" अदालत ने राज्य सरकार, भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) और अन्य संबंधित विभागों से विस्तृत शपथपत्र दाखिल कर जवाब देने का निर्देश दिया है।

'सड़कें डेथ जोन क्यों बन रही हैं?'
सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि प्रदेश में हर दिन सड़क हादसों में लोगों की जान जा रही है। कई राष्ट्रीय और राज्य राजमार्ग ऐसे हैं, जहां लगातार दुर्घटनाएं हो रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग प्रभावी कदम उठाते नजर नहीं आ रहे। अदालत ने कहा कि सड़कों पर आवारा मवेशियों की मौजूदगी और बेतरतीब खड़े भारी वाहनों के कारण आम लोगों की जान खतरे में पड़ रही है।

सरकार और NHAI से मांगा विस्तृत जवाब
हाई कोर्ट ने राज्य सरकार, NHAI और अन्य संबंधित विभागों को निर्देश दिया है कि वे शपथपत्र के माध्यम से यह बताएं कि सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करने, आवारा मवेशियों को नियंत्रित करने, अवैध पार्किंग रोकने और दुर्घटनाओं में कमी लाने के लिए अब तक क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल कागजी योजनाएं नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर किए गए कार्यों की जानकारी प्रस्तुत की जाए।

सड़क सुरक्षा समिति की बैठकों पर भी सवाल
अदालत ने सड़क सुरक्षा समितियों की कार्यप्रणाली पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने कहा कि नियमों के अनुसार जिला स्तर पर सड़क सुरक्षा समिति की बैठकें हर महीने होना अनिवार्य है, लेकिन कई जगह इन बैठकों का नियमित आयोजन नहीं हो रहा। अदालत ने संबंधित अधिकारियों से पूछा कि आखिर इन बैठकों में लापरवाही क्यों बरती जा रही है और इसका जिम्मेदार कौन है।

अगली सुनवाई में देना होगा जवाब
हाई कोर्ट ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि सड़क सुरक्षा जैसे गंभीर मुद्दे पर अब किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। अदालत ने सभी संबंधित विभागों को अगली सुनवाई से पहले अपना विस्तृत जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है। अब नजर इस बात पर रहेगी कि सरकार और संबंधित एजेंसियां अदालत के सवालों का क्या जवाब देती हैं और सड़क हादसों पर अंकुश लगाने के लिए कौन से ठोस कदम सामने आते हैं।