
रायपुर | छत्तीसगढ़ में एक तरफ पुलिस जवानों का अकाल है, तो दूसरी तरफ बस्तर के अंदरूनी इलाकों से पैरामिलिट्री फोर्स को समेटा जा रहा है। राज्य में पुलिस के 84 हजार से ज्यादा पद मंजूर हैं, लेकिन इनमें से लगभग 20 हजार खाली पड़े हैं। यानी पुलिस का हर चौथा पद खाली है। इस भारी किल्लत के बीच नक्सल मोर्चे पर डटे केंद्रीय सुरक्षा बलों की चरणबद्ध वापसी चालू हो गई है। अब तक करीब 30% बल वापस भेजा जा चुका है और अगले छह महीने में आधी फोर्स बस्तर से बाहर होगी।
केंद्रीय बलों की वापसी का सीधा असर बस्तर के सुरक्षा चक्र पर पड़ेगा। जंगलों के भीतर बने कैंपों में ज्यादातर केंद्रीय बल ही तैनात हैं। इनके जाने के बाद अंदरूनी इलाकों की पूरी जवाबदेही राज्य पुलिस पर आ जाएगी, जो पहले से ही कर्मचारियों की कमी से जूझ रही है।
बस्तर में 400 से ज्यादा कैंप, 52 हजार केंद्रीय जवान थे तैनात
नक्सल प्रभावित इलाकों में केंद्र के करीब 52 हजार जवान तैनात रहे हैं। इनमें सीआरपीएफ की 40, आईटीबीपी की 8 और बीएसएफ की 4 बटालियन शामिल हैं। इनकी मुख्य तैनाती सुकमा, दंतेवाड़ा, बीजापुर, नारायणपुर, कोंडागांव और कांकेर जिले में रही है। इसके अलावा मोहला-मानपुर, राजनांदगांव, कबीरधाम और गरियाबंद में भी केंद्रीय बल तैनात हैं।
ये जवान 400 से ज्यादा कैंपों में रहकर अंदरूनी इलाकों में मोर्चा संभाले हुए थे। अब इनकी वापसी शुरू हो गई है। सीआरपीएफ के 40 हजार जवानों में से 30% को दिल्ली, पश्चिम बंगाल और असम भेजा जा चुका है। अगले दो महीनों में कुछ और टुकड़ियों को जम्मू भेजने की तैयारी है।
बड़े शहरों का हाल: स्वीकृत पद कम, तैनात उससे भी कम
* रायपुर: जिले में पुलिस के 3650 पद स्वीकृत हैं, लेकिन सिर्फ 2750 जवान ही मैदान में हैं। करीब 900 पद खाली पड़े हैं। 40 लाख की आबादी के हिसाब से यहां कम से कम 5400 जवानों की जरूरत है। कमिश्नरी लागू होने के बाद रायपुर के 21 थानों में करीब 2100 और ग्रामीण इलाकों में 700 का बल तैनात है।
* दुर्ग-भिलाई: 15 लाख से ज्यादा आबादी वाली इस ट्विन सिटी में 2600 पद मंजूर हैं, पर काम सिर्फ 1990 जवानों के भरोसे चल रहा है। यहां 600 से ज्यादा पद खाली हैं।
* बिलासपुर: 35 लाख से ज्यादा आबादी वाले इस जिले में 1792 पुलिसकर्मी तैनात हैं और 387 पद खाली हैं। इनमें ज्यादातर पद सिपाहियों के हैं।
राज्य में करीब 25% पुलिस बल कम है। नए पदों पर भर्ती और कमी को पूरा करने के लिए सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। मंजूरी मिलते ही खाली पदों को भरा जाएगा।
अरुणदेव गौतम, डीजीपी