
छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग में आवारा कुत्तों का आतंक लगातार बढ़ता जा रहा है। सूरजपुर जिले में कुत्ते के काटने से घायल दो वर्षीय बच्ची नीरजा की मेडिकल कॉलेज अस्पताल में इलाज के दौरान मौत हो गई। एक सप्ताह के भीतर कुत्ते के काटने से अस्पताल में यह दूसरी मौत है। लगातार हो रही घटनाओं ने आवारा कुत्तों के बढ़ते खतरे और रेबीज से बचाव की व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं।
आवारा कुत्ते के हमले में घायल हुई थी मासूम
जानकारी के अनुसार, सूरजपुर जिले के जयनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम कल्याणपुर गेहलापारा निवासी सीताराम की दो वर्षीय बेटी नीरजा करीब 10 दिन पहले घर के बाहर खेल रही थी। इसी दौरान एक आवारा कुत्ते ने उस पर हमला कर दिया और उसे काटकर गंभीर रूप से घायल कर दिया।
घटना के समय बच्ची की मां अपने मायके रामानुजनगर थाना क्षेत्र के ग्राम छिंदिया गई हुई थी। बच्ची परिवार के अन्य सदस्यों के साथ घर पर थी। कुत्ते के हमले के बाद परिजन तत्काल नीरजा को मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां चिकित्सकों ने प्राथमिक उपचार किया और रेबीज का इंजेक्शन लगाने के बाद बच्ची को घर भेज दिया।
अचानक बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम
बताया जा रहा है कि मंगलवार को अचानक नीरजा की तबीयत बिगड़ने लगी। बच्ची की हालत देखकर परिजन घबरा गए और उसे दोबारा मेडिकल कॉलेज अस्पताल लेकर पहुंचे। अस्पताल में चिकित्सकों ने तत्काल उपचार शुरू किया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद मासूम को बचाया नहीं जा सका। इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।
दो साल की बच्ची की मौत से परिवार में मातम पसरा हुआ है। वहीं, इस घटना ने एक बार फिर आवारा कुत्तों के हमलों और रेबीज संक्रमण को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
एक सप्ताह में दूसरी मौत, पहले महिला ने गंवाई थी जान
मेडिकल कॉलेज अस्पताल में कुत्ते के काटने से मौत की यह एक सप्ताह के भीतर दूसरी घटना है। इससे पहले रविवार को सूरजपुर जिले के प्रतापपुर क्षेत्र के ग्राम नवाधक्की निवासी एक महिला की भी मौत हो गई थी।
जानकारी के अनुसार, महिला को कुछ दिन पहले आवारा कुत्ते ने काट लिया था। इसके बाद उसकी तबीयत बिगड़ने लगी और उसमें रेबीज संक्रमण के लक्षण दिखाई देने लगे। गंभीर हालत में उसे मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई।
लगातार सामने आ रही इन घटनाओं से ग्रामीण क्षेत्रों के साथ शहरी इलाकों में भी आवारा कुत्तों की समस्या को लेकर चिंता बढ़ गई है। खासकर बच्चों की सुरक्षा और समय पर रेबीज से बचाव के उपाय उपलब्ध कराने की जरूरत महसूस की जा रही है।
कुत्ता काटने पर तुरंत करें ये उपाय
वरिष्ठ पशु चिकित्सक डॉ. सीके मिश्रा के अनुसार, कुत्ते के काटने के बाद लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है। ऐसी स्थिति में सबसे पहले घाव को साबुन और बहते साफ पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए।
घाव पर हल्दी, मिर्च, चूना या किसी भी प्रकार की घरेलू सामग्री नहीं लगानी चाहिए। इसके बाद बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचकर चिकित्सकीय सलाह के अनुसार एंटी रेबीज वैक्सीन लगवानी चाहिए।
गहरे घाव की स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन (RIG) भी दिया जा सकता है। वैक्सीन की निर्धारित खुराक का पूरा कोर्स करना बेहद जरूरी है। बीच में टीकाकरण छोड़ना खतरनाक हो सकता है।
आवारा कुत्तों पर नियंत्रण की जरूरत
सरगुजा संभाग में लगातार हो रही इन घटनाओं ने स्थानीय प्रशासन और नगर निकायों की जिम्मेदारी पर भी सवाल खड़े किए हैं। आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या पर नियंत्रण, रेबीज टीकाकरण अभियान और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना बेहद जरूरी है। खासकर छोटे बच्चों को आवारा कुत्तों से दूर रखने और किसी भी हमले के बाद तत्काल अस्पताल पहुंचाने की जरूरत है।
ध्यान दें: रेबीज के लक्षण शुरू होने के बाद बीमारी लगभग हमेशा जानलेवा होती है, लेकिन समय पर उचित चिकित्सा और निर्धारित पोस्ट-एक्सपोजर उपचार से इससे बचाव संभव है। इसलिए कुत्ते के काटने की घटना को कभी भी मामूली न समझें।