रायपुर। छत्तीसगढ़ में नीट पीजी (NEET PG) परीक्षा पास करने वाले अनुबंधित डॉक्टरों के सामने उच्च शिक्षा हासिल करने की राह में नई मुश्किल खड़ी हो गई है। विशेषज्ञ डॉक्टर बनने की तैयारी कर रहे चिकित्सकों को विभागीय अनुमति और बॉन्ड की शर्तों को लेकर असमंजस का सामना करना पड़ रहा है। सबसे बड़ी परेशानी जमीन या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) गिरवी रखने की अनिवार्यता को लेकर है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल की ओर से इस बाध्यता से राहत मिलने की उम्मीद जताए जाने के बाद भी पुराने नियमों के आधार पर दस्तावेजों की जांच जारी है।

इस बीच 27 डॉक्टरों की फाइल स्वास्थ्य संचालनालय से मंत्रालय पहुंच गई है। अब इन चिकित्सकों को उच्च शिक्षा के लिए अनुमति और अनापत्ति प्रमाण-पत्र (NOC) जारी करने पर अंतिम निर्णय शासन को लेना है। डॉक्टरों को आशंका है कि यदि समय पर फैसला नहीं हुआ, तो पीजी काउंसिलिंग और प्रवेश की प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है।

27 डॉक्टरों की NOC का प्रस्ताव मंत्रालय में

स्वास्थ्य संचालनालय ने 27 अक्टूबर 2026 को लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के अवर सचिव को पत्र भेजकर 27 अनुबंधित चिकित्सकों को उच्च शिक्षा की अनुमति देने का प्रस्ताव प्रस्तुत किया है। ये डॉक्टर प्रदेश के अलग-अलग सरकारी मेडिकल कॉलेजों, जिला अस्पतालों और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) कार्यालयों में पदस्थ हैं।

नीट पीजी परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद ये चिकित्सक अब अपनी पसंद के विषय में विशेषज्ञता हासिल करना चाहते हैं। इसके लिए विभागीय अनुमति और जरूरी दस्तावेजों की पूर्ति आवश्यक है। इसी प्रक्रिया के तहत स्वास्थ्य संचालनालय ने संबंधित डॉक्टरों के नियुक्ति आदेश, पदस्थापना विवरण, उपस्थिति संबंधी जानकारी और परीक्षा में प्राप्त रैंक का रिकॉर्ड मंत्रालय भेजा है।

फाइल में बॉन्ड से संबंधित दस्तावेज भी शामिल किए गए हैं। इनमें शपथ पत्र, जमीन गिरवी रखने और एफडी बंधक रखने से जुड़े विवरण शामिल हैं। अब शासन इन दस्तावेजों की समीक्षा कर तय करेगा कि संबंधित डॉक्टरों को किस प्रक्रिया और किन शर्तों के तहत उच्च शिक्षा की अनुमति दी जाए।

जमीन गिरवी रखने की बाध्यता बनी सबसे बड़ी समस्या

इस पूरे मामले में जमीन या एफडी गिरवी रखने की शर्त डॉक्टरों के लिए चिंता का प्रमुख कारण बनी हुई है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस परेशानी से करीब 70 डॉक्टर प्रभावित हो सकते हैं। इनमें 27 ऐसे चिकित्सक बताए जा रहे हैं, जिन्होंने जमीन गिरवी रखकर बॉन्ड जमा किया है।

कई परिवारों के लिए जमीन उनकी सबसे महत्वपूर्ण संपत्ति होती है। ऐसे में उसे गिरवी रखने की बाध्यता से आर्थिक दबाव बढ़ सकता है। डॉक्टरों का मानना है कि उच्च शिक्षा के लिए अनुमति देने की प्रक्रिया को सरल बनाया जाना चाहिए, ताकि विशेषज्ञ बनने की उनकी राह में अनावश्यक अड़चनें न आएं।

डॉक्टरों को उम्मीद थी कि सरकार इस शर्त में राहत देने के लिए ठोस कदम उठाएगी। हालांकि, अब तक इस संबंध में स्पष्ट लिखित आदेश सामने नहीं आने के कारण असमंजस बना हुआ है। स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल से भी इस मामले में स्थिति स्पष्ट करने की अपेक्षा की जा रही है।

NOC और बॉन्ड की शर्तें अलग-अलग, समझें पूरा मामला

डॉक्टरों के लिए यह समझना जरूरी है कि NOC और बॉन्ड की शर्तें दो अलग-अलग विषय हैं। अनापत्ति प्रमाण-पत्र के जरिए विभाग किसी चिकित्सक को आगे की पढ़ाई करने की अनुमति दे सकता है। दूसरी ओर, जमीन या एफडी गिरवी रखने की बाध्यता में बदलाव के लिए शासन का स्पष्ट निर्णय आवश्यक होगा।

स्वास्थ्य संचालनालय की ओर से मंत्रालय भेजे गए प्रस्ताव में 15 जुलाई 2020 के विभागीय परिपत्र का उल्लेख किया गया है। इसी परिपत्र के आधार पर बॉन्ड से जुड़े दस्तावेजों और शर्तों की जांच की जा रही है।

ऐसे में केवल NOC जारी होने से जमीन गिरवी रखने की शर्त स्वतः समाप्त नहीं होगी। डॉक्टरों को दोनों मामलों में स्पष्टता का इंतजार है। शासन को यह तय करना होगा कि उच्च शिक्षा के लिए अनुमति देने की प्रक्रिया क्या होगी और पहले से बॉन्ड जमा कर चुके चिकित्सकों को किस तरह की राहत दी जा सकती है।

NEET PG काउंसिलिंग की समयसीमा से बढ़ी चिंता

नीट पीजी परीक्षा पास करने के बाद डॉक्टरों के लिए काउंसिलिंग और प्रवेश की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है। निर्धारित समय पर आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध नहीं होने से प्रवेश संबंधी औपचारिकताओं में परेशानी आ सकती है।

इसी वजह से डॉक्टर जल्द निर्णय की मांग कर रहे हैं। उन्हें आशंका है कि NOC मिलने में देरी होने पर उनकी आगे की पढ़ाई प्रभावित हो सकती है। विशेषज्ञता हासिल करने के लिए की गई मेहनत के बावजूद प्रशासनिक प्रक्रिया में विलंब उनके लिए मुश्किलें बढ़ा सकता है।

इसके अलावा, पटवारियों की हड़ताल के कारण जमीन से संबंधित दस्तावेज जुटाने में भी परेशानी आने की आशंका जताई जा रही है। यदि दस्तावेजों की उपलब्धता प्रभावित होती है, तो बॉन्ड से जुड़ी प्रक्रिया में और देरी हो सकती है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से प्रदेश को होगा लाभ

डॉक्टरों को उच्च शिक्षा के बेहतर अवसर उपलब्ध कराना केवल उनके व्यक्तिगत करियर के लिए ही महत्वपूर्ण नहीं है, बल्कि इसका लाभ प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं को भी मिल सकता है। विशेषज्ञता हासिल करने के बाद चिकित्सक सरकारी अस्पतालों में मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने में योगदान दे सकते हैं।

छत्तीसगढ़ के सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से विभिन्न बीमारियों के इलाज की सुविधाओं को मजबूती मिल सकती है। ऐसे में उच्च शिक्षा के लिए अनुमति देने की प्रक्रिया समयबद्ध और स्पष्ट होना जरूरी है।

स्वास्थ्य मंत्री से डॉक्टरों को राहत की उम्मीद

अब सभी की नजर स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल और शासन के अगले फैसले पर टिकी है। डॉक्टरों के सामने प्रमुख सवाल हैं कि जमीन और एफडी गिरवी रखने की बाध्यता कब समाप्त होगी, क्या सरकार इस संबंध में लिखित आदेश जारी करेगी और पहले से जमीन गिरवी रख चुके 27 चिकित्सकों को क्या राहत मिलेगी।

इसके साथ ही यह भी महत्वपूर्ण है कि पीजी काउंसिलिंग और प्रवेश की प्रक्रिया से पहले संबंधित डॉक्टरों को NOC मिल पाती है या नहीं।

फिलहाल 27 अनुबंधित डॉक्टरों की उच्च शिक्षा संबंधी अनुमति का प्रस्ताव मंत्रालय में विचाराधीन है। बॉन्ड की शर्तों पर भी अंतिम निर्णय का इंतजार है। अब शासन के फैसले से ही स्पष्ट होगा कि डॉक्टरों को राहत कब मिलेगी और विशेषज्ञ बनने की उनकी राह कितनी आसान होगी।