
बिलासपुर : स्कूल की जर्जर दीवार के नीचे दबकर 7 साल की मासूम छात्रा की मौत के मामले में अदालत ने सख्त रवैया अपनाया है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर बरती गई लापरवाही स्कूल संचालक को भारी पड़ी। नवम अपर सत्र न्यायालय के न्यायाधीश अगम कुमार कश्यप ने सरकंडा स्थित निर्मल ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल के संचालक नरेश कुमार साहू को गैर इरादतन हत्या के मामले में दोषी ठहराते हुए 5 साल के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है। अदालत ने उस पर 2 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया है। जुर्माना अदा नहीं करने पर 6 महीने का अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतना होगा।
लंच के समय बाथरूम गई थी वैशाली, नहीं आई लौटकर
यह दर्दनाक घटना 4 जनवरी 2022 की है। सरकंडा के गीतांजली सिटी फेस-2 स्थित निर्मल ज्ञानोदय पब्लिक स्कूल में पढ़ने वाली 7 वर्षीय वैशाली साहू लंच के दौरान बाथरूम गई थी। इसी बीच बाथरूम की जर्जर दीवार अचानक ढह गई। दीवार के मलबे में दबने से बच्ची गंभीर रूप से घायल हो गई। आनन-फानन में उसे इलाज के लिए सिम्स अस्पताल ले जाया गया, लेकिन चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। एक मासूम की मौत से परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा।
बिना नींव के खड़ी थी दीवार, संचालक को थी जानकारी
मामले की जांच में स्कूल के बाथरूम की दीवार की स्थिति को लेकर गंभीर तथ्य सामने आए। लोक निर्माण विभाग के उप अभियंता के निरीक्षण में पता चला कि दीवार को बिना नींव के सीधे फर्श पर खड़ा किया गया था। उसकी हालत जर्जर और असुरक्षित थी। गवाहों और स्कूली बच्चों के बयानों से भी दीवार की खराब स्थिति की पुष्टि हुई। यहां तक कि दीवार को गिरने से बचाने के लिए पेड़ के सहारे पत्थर लगाए गए थे। अभियोजन पक्ष के अनुसार, स्कूल संचालक को दीवार की खतरनाक स्थिति की जानकारी पहले से थी। इसके बावजूद न तो उसकी मरम्मत कराई गई और न ही बच्चों को संभावित खतरे से बचाने के लिए पर्याप्त इंतजाम किए गए। अदालत के समक्ष यही लापरवाही मामले का अहम पहलू बनी।
किराएदार होने की दी दलील, नहीं आया काम
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने तर्क दिया कि नरेश कुमार साहू स्कूल भवन का मालिक नहीं, बल्कि किराएदार था। यह भी दलील दी गई कि बच्चों को बाथरूम का इस्तेमाल नहीं करने के लिए कहा गया था। हालांकि, अभियोजन पक्ष के साक्ष्यों और गवाहों के बयानों के आधार पर अदालत ने बचाव पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया। अदालत ने माना कि स्कूल संचालक की जिम्मेदारी केवल विद्यालय चलाने तक सीमित नहीं है, बल्कि परिसर में पढ़ने वाले बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी उसका दायित्व है। जब किसी संभावित खतरे की जानकारी होने के बावजूद उसे दूर करने के लिए जरूरी कदम नहीं उठाए जाते, तो ऐसी लापरवाही के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
लापरवाही ने छीन ली मासूम की जिंदगी
वैशाली की मौत का मामला स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं और सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत को फिर सामने लाता है। जिस परिसर में अभिभावक अपने बच्चों को सुरक्षित भविष्य की उम्मीद के साथ भेजते हैं, वहां जर्जर दीवार जैसी खामी जानलेवा साबित हुई। अदालत ने उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर संचालक को दोषी ठहराते हुए 5 साल के सश्रम कारावास और अर्थदंड की सजा सुनाई।