इंदौर.जिस देवधरम टेकरी (पितृ पर्वत) पर नगरीय विकास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का रेस्ट हाउस बन चुका है, असल में उस देवधरम टेकरी का मूल मालिक इंदौर नगर निगम है। इसी पहाड़ी पर धर्मशाला निर्माणाधीन है। साथ ही बटुकों को ठहराने के लिए हॉस्टल बनाया जा रहा है। मगर नगर निगम दफ्तर से अपने ही मालिकाना हक वाली इस टेकरी की मूल फाइल ही गायब है।

करीब 26 साल पहले नगर निगम ने यहां हरियाली उगाने का प्रस्ताव पारित किया था। पितृ-पर्वत योजना भी मंजूर हुई थी। पितृ-पर्वत के प्रस्तावों की पूरी जानकारी उसी फाइल में मौजूद थी। दो दशक से भी ज्यादा का वक्त निकल गया, मगर गायब फाइल को ढूंढ़ने की कोशिश भी नहीं की गई। प्रशासनिक लापरवाही ऐसी कि निगम ने आज तक मामले में एफआईआर दर्ज नहीं कराई है।

कागजों में सिर्फ 'देवधरम पानी की टंकी'

नगर निगम के रिकॉर्ड में पितृ-पर्वत नाम की कोई जगह मौजूद ही नहीं है। सरकारी रिकॉर्ड में पूरी पहाड़ी देवधरम पानी की टंकी के नाम से दर्ज है। इसीलिए निगम के साल 2000 में आए प्रस्तावों में भी इसे देवधरम पानी की टंकी के नाम से ही संबोधित किया गया है।

दिसंबर 2000 का वो आखिरी प्रस्ताव

देवधरम टेकरी के विषय में निगम रिकॉर्ड में कोई प्रस्ताव यदि आया था, तो दिसंबर 2000 में परिषद से पारित वह आखिरी प्रस्ताव था। इसके बाद किसी बैठक में देवधरम टेकरी को लेकर कोई नया प्रस्ताव नहीं लाया गया है। न ही यहां हरियाली उगाने को लेकर और न ही इस सरकारी जमीन को किसी अन्य को देने का कोई प्रस्ताव नगर निगम में मौजूद है।

मृत अफसर के मत्थे जिम्मेदारी

गायब फाइल की जिम्मेदारी उस अफसर के नाम पर बताई जा रही है, जो अब इस दुनिया में नहीं हैं। बताया जा रहा है कि यह फाइल जिस अफसर संतोष मोदी के पास होने की बात रिकॉर्ड में दर्ज है, वे नगर निगम में सचिव का कार्यभार संभाल चुके थे। उनका काफी पहले ही निधन हो चुका है। टेकरी पर हरियाली का प्रस्ताव जून 2000 को पास हुआ था। पितृ-पर्वत योजना भी मंजूर हुई थी, लेकिन 26 साल से पूरी फाइल ही गायब है।