रायपुर। प्रदेश में भाजपा सरकार अपना आधा सफर यानी ढाई साल का कार्यकाल पूरा कर चुकी है। सत्ता के गलियारों में कामकाज का ढिंढोरा पीटा जा रहा है, लेकिन दूसरी तरफ पार्टी संगठन ने चुपचाप अपने विधायकों की असलियत नापना शुरू कर दिया है।

पार्टी के अंदरूनी सर्वे ने कई माननीयों की नींद उड़ा दी है। सूत्रों की मानें तो इस सर्वे में करीब 20 विधायकों की स्थिति बिल्कुल भी संतोषजनक नहीं है। चुनाव जीतने के बाद इनमें से कई नेताओं ने जो रवैया अपनाया है, उसने संगठन की माथे पर सिलवटें ला दी हैं।

कार्यकर्ताओं से दूरी और जनता में नाराजगी

रिपोर्ट में जो बातें सामने आई हैं, वो किसी भी पार्टी के लिए खतरे की घंटी से कम नहीं हैं। विधानसभा क्षेत्रों में न तो स्थानीय जनता इन विधायकों के कामकाज से खुश है और न ही पार्टी का अपना काडर। जिन कार्यकर्ताओं ने चुनाव के वक्त पसीना बहाकर झंडे उठाए, विधायक जी अब उनसे ही कोसों दूर नजर आ रहे हैं।

फीडबैक में पता चला है कि ग्राउंड पर इन नेताओं की सक्रियता लगभग गायब है। नियमित जनसंपर्क के नाम पर सिर्फ औपचारिकता निभाई जा रही है। ऐसे में स्थानीय संगठन और कार्यकर्ताओं का उत्साह ठंडा पड़ गया है, जिसका सीधा असर आगामी चुनाव की तैयारियों पर पड़ना तय है।

विधायक निधि और योजनाओं का हाल

संगठन की पैनी नजर इस बात पर भी है कि विधायक अपनी निधि का पैसा कहां और कैसे खर्च कर रहे हैं। क्षेत्र की स्थानीय जरूरतों को दरकिनार किया जा रहा है। सरकार की योजनाएं और विकास कार्य जनता तक उस स्तर पर नहीं पहुंच रहे, जैसी संगठन ने उम्मीद लगाई थी।

तीन मंत्रियों के नाम भी लिस्ट में

इस सर्वे का सबसे दिलचस्प पहलू यह है कि खराब प्रदर्शन करने वाले इन 20 चेहरों में सरकार के तीन मंत्री भी शामिल बताए जा रहे हैं। हालांकि, संगठन ने अभी किसी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है, लेकिन अंदरखाने खलबली मची हुई है। बड़े ओहदे पर बैठने के बाद भी अगर क्षेत्र की जनता और कार्यकर्ता नाराज हैं, तो पार्टी इसे हल्के में लेने के मूड में नहीं है।

अभी टिकट नहीं कटेगा, लेकिन यह 'परफॉर्मेंस अलर्ट' है

पत्रकारीय नजरिए से देखें तो चुनाव जीतते ही कई नेताओं को लगने लगता है कि अब पांच साल आराम से कटेंगे, लेकिन संगठन ने यह सर्वे कराकर बता दिया है कि ऐसा होने वाला नहीं है।

फिलहाल इसे विधायकों के लिए एक 'परफॉर्मेस अलर्ट' माना जा रहा है। आधा कार्यकाल अभी बचा है। आने वाला एक से डेढ़ साल ही यह तय करेगा कि कौन सा विधायक अपनी कुर्सी बचा पाएगा। पार्टी ने यह संदेश दे दिया है कि क्षेत्र में जनता और संगठन के बीच पकड़ मजबूत करनी ही होगी।

अगले आकलन में अगर इन माननीयों के कामकाज में सुधार नहीं आया, तो टिकट वितरण के वक्त कई मौजूदा चेहरों की छुट्टी हो सकती है और उनकी जगह पार्टी नए चेहरों पर दांव खेलने से पीछे नहीं हटेगी।