बालोद। बालोद जिले के आदिवासी विकासखंड डौंडी अंतर्गत ग्राम पंचायत बोरगांव में जिला खनिज न्यास (DMF) की राशि से कराए जा रहे निर्माण कार्यों में अनियमितता के आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि हाई स्कूल परिसर में साइकिल स्टैंड शेड और सीसी निर्माण के लिए स्वीकृत लाखों रुपये की राशि के बावजूद कार्य अधूरा है, जबकि सरकारी अभिलेखों में इसे पूर्ण दर्शा दिया गया है। मामला सामने आने के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता, भुगतान प्रक्रिया और निगरानी व्यवस्था पर सवाल उठने लगे हैं।

जानकारी के अनुसार वर्ष 2025 में बोरगांव हाई स्कूल में विद्यार्थियों की सुविधा के लिए 13.86 लाख रुपये की लागत से साइकिल स्टैंड शेड और कांक्रीटीकरण कार्य स्वीकृत हुआ था। इस कार्य की निर्माण एजेंसी ग्राम पंचायत को बनाया गया था, लेकिन ग्रामीणों का आरोप है कि पंचायत के बजाय एक निजी ठेकेदार ने पूरा निर्माण अपने स्तर पर कराया।WhatsApp-Image-2026-07-04-at-8.20.51-AM-1024x768.jpeg

अधूरा निर्माण, पूर्णता का बोर्ड
स्थानीय लोगों का आरोप है कि निर्माण के दौरान पुराने बाउंड्री वॉल का ही उपयोग करते हुए उसके ऊपर सीमित ईंट जोड़कर शेड के पिलर खड़े कर दिए गए है। वहीं सामने की ओर बनाए गए कॉलम और सीसी कार्य की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि मौके पर आज भी निर्माण कार्य अधूरा दिखाई देता है, जबकि परिसर में लगे सूचना बोर्ड पर 12 जून 2026 को कार्य पूर्ण होने का उल्लेख किया गया है। उनका दावा है कि वास्तविकता में करीब आधा काम अभी भी बाकी है।

सरपंच ने लगाए गंभीर आरोप
ग्राम पंचायत बोरगांव की सरपंच देवकी बाई कोठपरिया का आरोप है कि उन्होंने निर्माण की गुणवत्ता और पुरानी दीवार पर शेड बनाने का कई बार विरोध किया था, लेकिन उनकी बात नहीं सुनी गई। उनका कहना है कि पंचायत के खाते में राशि आने के बाद भुगतान कर दिया गया, जबकि निर्माण कार्य संतोषजनक ढंग से पूरा नहीं हुआ। WhatsApp-Image-2026-07-04-at-8.20.50-AM-1024x768.jpeg

पूरे क्षेत्र में उठ रहे सवाल
स्थानीय जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों का आरोप है कि आदिवासी विकासखंड में DMF के कई कार्यों में पंचायतों की जगह ठेकेदारों का प्रभाव बढ़ गया है। उनका कहना है कि कई योजनाओं में गुणवत्ता और पारदर्शिता को लेकर पहले भी सवाल उठ चुके हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।

जांच के बाद होगी कार्रवाई
जब पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज और निर्माण स्थल की तस्वीरें जनपद पंचायत के सीईओ डी.डी. मांडले के सामने रखी गईं तो उन्होंने कहा कि यदि निर्माण कार्य में गुणवत्ता संबंधी गड़बड़ी या अन्य अनियमितता पाई जाती है, तो पूरे मामले की जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि जांच रिपोर्ट के आधार पर निर्माण कार्य का तकनीकी मूल्यांकन कराया जाएगा और किसी प्रकार की लापरवाही या नियमों का उल्लंघन सामने आता है तो नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब इस मामले में निगाहें जांच पर टिकी हैं। देखना होगा कि आरोपों की पुष्टि होने पर जिम्मेदार अधिकारियों, निर्माण एजेंसी या संबंधित पक्षों के खिलाफ क्या कदम उठाए जाते हैं ?