जगदलपुर/रायपुर.जल संसाधन विभाग (WRD) में उच्च पदों पर बैठने के लिए अफसरों द्वारा विभागीय रिकॉर्ड से छेड़छाड़ करने का बड़ा मामला सामने आया है। पदोन्नति की अंधी दौड़ में अधिकारियों ने नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए अपनी पुरानी गोपनीय चरित्रावली (ACR) में ही बदलाव कर डाला। ताजा मामला जगदलपुर और बेमेतरा से जुड़ा है, जहां पदस्थ कार्यपालन अभियंताओं ने ऑफिस के बड़े बाबुओं की मिलीभगत से अपने रिकॉर्ड अपग्रेड करवा लिए। मामला सामने आने के के बाद जल संसाधन विभाग में हड़कंप मच गया है।

रसूखदार ईई वेद प्रकाश पांडे का 'खेल'

जगदलपुर में पदस्थ कार्यपालन अभियंता वेद प्रकाश पांडे ने प्रमोशन पाने के लिए पूरी प्रशासनिक व्यवस्था को ही अंधेरे में रखा। विभागीय सूत्रों के अनुसार, पांडे ने सिस्टम की कमजोरियों का फायदा उठाते हुए अपनी पुरानी एसीआर में मनमाना बदलाव करवा लिया। कार्यालयीन स्टाफ की मिलीभगत के बिना गोपनीय दस्तावेजों तक पहुंचना और उनमें कांट-छांट करना किसी भी व्यक्ति के लिए संभव नहीं है।

पुराने विवादों से रहा है गहरा नाता:

वेद प्रकाश पांडे का विवादों से पुराना नाता रहा है। कुछ समय पूर्व जगदलपुर में अपने सरकारी बंगले पर बिना अनुमति अवैध निर्माण कराने को लेकर वे सुर्खियों में आए थे। जब स्थानीय मीडिया ने इस निर्माण को लेकर जानकारी जुटानी चाही, तो उन्होंने अपने रसूख के दम पर पूरा मामला दबाने का प्रयास किया। पद और प्रभाव का इस्तेमाल कर लगातार कार्रवाई से बचते आ रहे पांडे की कार्यशैली की पोल अब प्रमोशन के इस नए फर्जीवाड़े ने खोल दी है। 

ठेकेदारों और छोटे कर्मचारियों में चर्चा है कि जल संसाधन विभाग में कोई भी फाइल आसानी से बदलवाई जा सकती है। वहां अफसरों की निगरानी व्यवस्था पूरी तरह से ध्वस्त है।

बेमेतरा में शिवहरे का मामला: 3 साल में अपने आप बढ़ गई ग्रेडिंग

ठीक ऐसा ही फर्जीवाड़ा बेमेतरा जिले में पदस्थ कार्यपालन अभियंता सी.एस. शिवहरे के मामले में भी देखने को मिला है। शिवहरे की पुरानी एसीआर में हेरफेर कर उन्हें उच्च पद पर प्रमोट किया गया। महज तीन साल के भीतर बंद फाइलों में दर्ज ग्रेडिंग में भारी बदलाव कर दिया गया।

अब प्रश्न यह है कि जो एसीआर पूर्व में लिखी जा चुकी थी और जिसके आधार पर 2023 में पहले ही प्रमोशन मिल चुका था, उसकी ग्रेडिंग सालों बाद अपने आप कैसे बढ़ गई? क्या बंद हो चुकी फाइल में पुरानी रेटिंग को ओवरराइट किया गया या पन्ने ही बदल दिए गए?

नियमों की अनदेखी : अब उच्चस्तरीय जांच की उठी मांग

पदोन्नति के लिए 17 अप्रैल 2026 को विभागीय पदोन्नति समिति (DPC) की बैठक आयोजित की गई थी। इसके बाद नवा रायपुर स्थित मंत्रालय से 4 मई 2026 को प्रमोशन का आदेश जारी किया गया। इस आदेश का क्रमांक ईएसटीबी 102 1 1 2026 डब्ल्यूआरडी है। यह आदेश पुनरीक्षित डीपीसी के आधार पर जारी किया गया था।

जब पुराने दस्तावेजों और नई डीपीसी के ग्रेडिंग चार्ट का मिलान किया गया, तो भारी विसंगतियां उजागर हुईं। यह पूरी तरह से सरकारी रिकॉर्ड में छेड़छाड़ का आपराधिक मामला है। बंद हो चुकी फाइल में बिना किसी आधार के बदलाव कर प्रमोशन लेना विभागीय नियमों के खिलाफ है।

ऐसा ही प्रमोशन का एक मामला दुर्ग में भी सामने आया है जहां विभाग के अधीक्षण अभियंता आशुतोष सारस्वत पर प्रमोशन में खेल करने के आरोप लगें है