नई दिल्ली। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच भारत ने ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा कदम उठाया है। नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में घोषणा करते हुए बताया कि देश में ईंधन और गैस की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सात सशक्त समूह (Empowered Groups) गठित किए गए हैं, जो हर स्तर पर हालात की निगरानी और रणनीति तैयार कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ रहा है, लेकिन भारत सरकार पहले से ही अलर्ट मोड में है। इन सात समूहों में अलग-अलग क्षेत्रों के विशेषज्ञ और वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं, जो पेट्रोल-डीजल, एलपीजी, गैस सप्लाई, उर्वरक, महंगाई और सप्लाई चेन जैसे महत्वपूर्ण सेक्टर पर लगातार काम कर रहे हैं। यह मॉडल कोविड काल के दौरान बनाए गए समूहों की तर्ज पर तैयार किया गया है, ताकि त्वरित फैसले लिए जा सकें।
सरकार की रणनीति को शॉर्ट टर्म, मीडियम टर्म और लॉन्ग टर्म प्लानिंग में विभाजित किया गया है। एक अंतर-मंत्रालयीय समूह नियमित बैठक कर आयात-निर्यात, ऊर्जा आपूर्ति और लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियों की समीक्षा कर रहा है, ताकि किसी भी संभावित संकट से पहले समाधान तैयार किया जा सके।
इस बीच ऊर्जा आपूर्ति को लेकर राहत भरी खबर भी सामने आई है। दो भारतीय एलपीजी कैरियर ‘जग वसंत’ और ‘पाइन गैस’ सुरक्षित रूप से हॉर्मुज जलडमरूमध्य पार कर चुके हैं और भारत की ओर बढ़ रहे हैं। यह कदम ऐसे समय में बेहद अहम माना जा रहा है जब वैश्विक शिपिंग और ऊर्जा सप्लाई चेन पर दबाव बना हुआ है।
प्रधानमंत्री मोदी ने यह भी कहा कि सरकार केवल ईंधन और गैस तक सीमित नहीं है, बल्कि उर्वरकों की उपलब्धता, महंगाई नियंत्रण और आवश्यक वस्तुओं की सप्लाई को भी प्राथमिकता दी जा रही है। उन्होंने राज्यों से सहयोग की अपील करते हुए कहा कि “टीम इंडिया” के रूप में मिलकर इस वैश्विक चुनौती का सामना करना होगा।
इसके साथ ही विदेश मंत्रालय भारतीय नागरिकों की सुरक्षित वापसी पर भी काम कर रहा है, क्योंकि कई देशों में हवाई सेवाएं प्रभावित हुई हैं। सरकार ने भरोसा दिलाया है कि देश की अर्थव्यवस्था मजबूत है और हर परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तैयारी की जा चुकी है।





