
बिलासपुर। जिले के सिरगिट्टी थाना इलाके में इन दिनों कानून-व्यवस्था पूरी तरह से राम भरोसे चल रही है। इलाके में अवैध शराब और सट्टे का धंधा बेखौफ होकर फल-फूल रहा है। हालत कुछ ऐसी बन गई है कि थानेदार साहब को इलाके की पेट्रोलिंग और गश्त से कहीं ज्यादा अपनी 'चुस्की' की फिक्र सताती है। ऐसे में अवैध काम करने वालों की तो मानो लॉटरी ही निकल पड़ी है। अब लोगों के बीच यह चर्चा आम हो गई है कि आखिर इस बेलगाम होते जा रहे सिस्टम पर लगाम कसेगा कौन?
सूत्रों से छनकर जो जानकारियां बाहर आ रही हैं, वे पुलिस की कार्यशैली की पोल खोलने के लिए काफी हैं। तिफरा बाजार के पास स्थित एक हॉस्टल इन दिनों सट्टेबाजों का महफूज ठिकाना बन चुका है। बताया जा रहा है कि यहां दिन-दहाड़े सट्टे की पर्चियां काटी जा रही हैं और नंबर लिखे जा रहे हैं। मजे की बात तो यह है कि इस पूरे खेल को ऑपरेट करने वाला कोई नया खिलाड़ी नहीं, बल्कि वही पुराना और जाना-पहचाना 'खाईवाल' है। थाने के ज्यादातर सिपाही और पुलिसकर्मी उसके चेहरे से बहुत अच्छी तरह वाकिफ हैं। इसके बावजूद अगर यह कारोबार बेरोकटोक चल रहा है, तो सवाल लाजिमी है। क्या यह सारी गतिविधियां थाना प्रभारी की जानकारी में नहीं हैं? या फिर सब कुछ जानकर भी 'सब चलता है' की तर्ज पर आंखें मूंद ली गई हैं?
सटोरिए के हौसले किस कदर बुलंद हैं, इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि वह बाजार में सीना तानकर कहता फिरता है, 'मेरा कोई क्या बिगाड़ लेगा, मैं तो दोनों साहब को हर महीने तय चढ़ावा पहुंचा देता हूं।' इधर, थाना प्रभारी महोदय की कार्यप्रणाली भी चर्चा का विषय बनी हुई है। महकमे के अंदर ही दबी जुबान में यह कहा जा रहा है कि साहब का थाने आना-जाना महज एक रूटीन फॉर्मेलिटी बनकर रह गया है। असल में थाने का पूरा कामकाज उनके भरोसेमंद मातहतों के ही कंधों पर टिका है।
कुछ सूत्र तो यहां तक दावा कर रहे हैं कि साहब कभी-कभार थाने के भीतर ही बैठकर मदिरा का लुत्फ उठाते हुए नजर आ जाते हैं। हालांकि, इन बातों की कोई स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन अगर इन चर्चाओं में रत्ती भर भी सच्चाई छिपी है, तो यह पुलिस विभाग की छवि पर एक गहरा दाग है।
सिरगिट्टी इलाके का मौजूदा माहौल देखकर बरसों पुरानी वो कहावत बिल्कुल सटीक बैठती नजर आती है- 'जब सैंया भये कोतवाल, तो अब डर काहे का।' जब कानून के पहरेदार ही अपने क्षेत्र की गतिविधियों से बेखबर रहने का नाटक करें, तो अपराधियों का बेखौफ होना तय है। कहीं अवैध शराब बिक रही है, तो कहीं सट्टे के नंबर लिखे जा रहे हैं, और इन्हें रोकने-टोकने वाला कोई नजर नहीं आता। सिरगिट्टी थाना क्षेत्र अब अपराधियों के लिए पूरी तरह से 'ऑल इज वेल' जोन बन गया है।
फिलहाल, ये तमाम बातें, आरोप और चर्चाएं सूत्रों के हवाले से बाजार में तैर रही हैं, जिनकी एक निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। अब सबकी निगाहें पुलिस महकमे के आला अफसरों पर टिकी हैं। देखना यह है कि क्या वे इन शिकायतों को संजीदगी से लेते हुए कोई ठोस कदम उठाएंगे, या फिर सिरगिट्टी थाने की व्यवस्था यूं ही 'चुस्कियों' के बीच चलती रहेगी। आम जनता जवाब मांग रही है, क्योंकि कानून का राज भरोसे और कार्रवाई से कायम होता है, सिर्फ खामोशी ओढ़ लेने से नहीं।