
बिलासपुर : शहर में लगातार बिजली की बढती समस्याओं से उपभोक्ताओं को हो रही परेशानियों को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य विद्युत वितरण कंपनी के चेयरमैन सुबोध सिंह ने अधिकारियों की मैराथन समीक्षा बैठक ली जिसमे अधिकारियों में कड़ी नाराजगी जताई। उन्होंने अधिकारियों से पूछा कि जब आंधी-तूफान पूरे प्रदेश में आते हैं तो सबसे अधिक बिजली गुल होने की शिकायतें केवल बिलासपुर से ही क्यों आती हैं? आखिर पूरे छत्तीसगढ़ में सबसे खराब बिजली व्यवस्था बिलासपुर की ही क्यों है?
बैठक में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ सभी जोन के सहायक अभियंता (एई) और कनिष्ठ अभियंता (जेई) मौजूद रहे। चेयरमैन के सवालों पर वरिष्ठ अधिकारी संतोषजनक जवाब नहीं दे सके। इसके बाद उन्होंने सीधे जमीनी स्तर पर काम कर रहे एई और जेई से स्थिति की जानकारी ली।
अधिकारियों ने बताया कि विभाग में कर्मचारियों की भारी कमी है। पिछले कुछ दिनों से संविदा कर्मचारियों की हड़ताल के कारण स्थिति और गंभीर हो गई है। लाइनमैनों की कमी से बिजली सुधार कार्य प्रभावित हो रहे हैं और जो काम आधे घंटे में पूरा हो जाता है, उसमें अब दो से तीन घंटे लग रहे हैं।
जमीनी समस्याओं को सुनने के बाद चेयरमैन ने बिजली व्यवस्था सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए। मंगला और कोनी क्षेत्र के तेजी से विस्तार को देखते हुए दोनों स्थानों पर नए बिजली जोन स्थापित करने की तत्काल मंजूरी दी गई। साथ ही बिजली अधोसंरचना को मजबूत करने के लिए 10 करोड़ रुपये का विशेष बजट भी स्वीकृत किया गया।
बैठक में पेड़ों की समय पर छंटाई और बिजली लाइनों के रख-रखाव को बेहतर बनाने के उद्देश्य से एक नई स्काई लिफ्ट मशीन खरीदने के भी निर्देश दिए गए। बैठक में कार्यपालन निदेशक ए.के. अम्बस्थ, अधीक्षण यंत्री सुरेश जांगड़े, आर.के. झा, कार्यपालन अभियंता अनुपम सरकार, बी.बी. नेताम, हेमंत चंद्रा, मिलिंद पांडे सहित सभी जोन के अधिकारी उपस्थित रहे।
ज्ञात हो कि खराब बिजली व्यवस्था को लेकर दो दिन पहले हाईकोर्ट ने भी नाराजगी जताते हुए संबंधित अधिकारियों से जवाब तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित है।
उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष जून में तत्कालीन चेयरमैन डॉ. रोहित यादव ने भी लगातार बिजली कटौती पर अधिकारियों को फटकार लगाई थी, लेकिन उसके बावजूद व्यवस्था में सुधार नहीं हो सका।
शहर में 5 मई को आए आंधी-तूफान के बाद से बिजली आपूर्ति पूरी तरह पटरी पर नहीं लौट सकी है। वीआईपी इलाकों तक में 27-27 घंटे का ब्लैकआउट देखने को मिला। मुंगेली नाका क्षेत्र में बुधवार रात ढाई बजे से गुल हुई बिजली गुरुवार शाम चार बजे बहाल हो सकी। वहीं गीतांजलि पार्क फेज-2 में पिछले एक सप्ताह से लगातार बिजली बाधित रहने, लो-वोल्टेज और अघोषित कटौती के कारण लोगों को पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।