
रायपुर | पर्यावरण नियमों की अनदेखी करके बिना ट्रीटमेंट किए खुले में दूषित पानी बहाने वाली फैक्ट्रियों पर हाई कोर्ट ने अपना रुख कड़ा कर लिया है। रायपुर के आसपास संचालित वेलकम, केडिया और भाटिया डिस्टलरी के खिलाफ अदालत ने सख्त कदम उठाए हैं। गंदा पानी छोड़ने के इस गंभीर मामले में अब इन तीनों कंपनियों से जवाब मांगा गया है। मीडिया द्वारा मामले को उठाने के बाद हाई कोर्ट ने इसे गंभीरता से लिया। जमीनी हकीकत और वस्तुस्थिति का पता लगाने के लिए हाई कोर्ट की तरफ से मामले की जांच के लिए दो कोर्ट कमिश्नर नियुक्त किए गए थे। इन दोनों कोर्ट कमिश्नरों ने मौके पर जाकर जांच की और 6 जुलाई को अपनी रिपोर्ट अदालत को सौंप दी है।
इस जांच रिपोर्ट ने तीनों डिस्टलरियों की बड़ी लापरवाही को उजागर कर दिया है। रिपोर्ट के तथ्यों को देखने के बाद हाई कोर्ट ने तीनों कंपनियों को कड़ी चेतावनी दी है। इसके साथ ही अदालत ने 22 जुलाई तक अपना विस्तृत जवाब प्रस्तुत करने का निर्देश दिया है। कोर्ट में पेश की गई रिपोर्ट में तीनों फैक्ट्रियों की अलग-अलग खामियां बताई गई हैं, जो इस प्रकार हैं:
वेलकम डिस्टलरी: वन विभाग के इलाके में जा रहा दूषित पानी
कोर्ट कमिश्नरों की जांच के मुताबिक, वेलकम डिस्टलरी से निकलने वाला दूषित पानी वन विभाग के इलाके में जा रहा है। गंदे पानी की निकासी के लिए बिछाई गई पाइपलाइन में भी लीकेज की बात सामने आई है। इस लापरवाही के चलते डिस्टलरी पर 56.4 लाख रुपये का जुर्माना लगाया जा चुका है, लेकिन हालात में सुधार नहीं हुआ है।
भाटिया वाइंस: खजूरी और शिवनाथ नदी के रास्ते में जहरीला पानी
भाटिया वाइंस के मामले में स्थिति और भी चिंताजनक मिली है। खजूरी और शिवनाथ नदी के रास्ते पर अत्यधिक जहरीला पानी बहता हुआ पाया गया है। पानी की जांच में बीओडी और सीओडी की मात्रा तय मानकों से काफी ज्यादा मिली है। इस जहरीले पानी के कारण नदियों की मछलियां भी मर रही हैं और पानी का प्राकृतिक संतुलन बिगड़ रहा है।
केडिया डिस्टलरी: खदानों के गड्ढों में जमा मिला गंदा पानी
केडिया डिस्टलरी के आसपास के इलाके की जांच में कोर्ट कमिश्नरों ने पाया कि डिस्टलरी का गंदा पानी पास की खदानों के गड्ढों में जाकर जमा हो रहा है। मौके के हालात देखकर कमिश्नरों ने यह आशंका जताई है कि यहां भी किसी बड़े लीकेज के कारण दूषित पानी बाहर आ रहा है।