
बिलासपुर : छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट में नए मुख्य न्यायाधीश के पदभार संभालने के बाद न्यायिक कार्यो के संचालन को लेकर नया रोस्टर जारी कर दिया गया है। हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल की ओर से जारी यह रोस्टर 8 सितंबर 2026 से प्रभावी हो गया है। नए रोस्टर में अलग-अलग डिवीजन बेंच और सिंगल बेंच को मामलों की स्पष्ट जिम्मेदारी सौंपी गई है।
नए रोस्टर के तहत डिवीजन बेंच-1 में जनहित याचिकाओं, रिट अपील, बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका, आपराधिक अवमानना और डिवीजन बेंच के सभी रिट एवं आपराधिक मामलों की सुनवाई होगी। टैक्स से जुड़े मामले और उनसे संबंधित रिट अपील भी इसी बेंच के अधिकार क्षेत्र में रहेंगेl
सिविल और कंपनी मामलों के लिए अलग डिवीजन बेंच
डिवीजन बेंच-2 को डिवीजन बेंच के उन सभी सिविल मामलों की जिम्मेदारी दी गई है, जिन्हें किसी अन्य डिवीजन बेंच को आवंटित नहीं किया गया है। इसके साथ ही कंपनी अपील, वैवाहिक मामलों से संबंधित प्रथम अपील और वाणिज्यिक अपीलीय मामलों की सुनवाई भी इसी बेंच में होगी।
जमानत मामलों से लेकर आपराधिक अपील तक अलग-अलग बेंच
नए रोस्टर में सिंगल बेंच के मामलों का भी वर्गीकरण किया गया है। जस्टिस पीपी साहू की सिंगल बेंच-1 में अग्रिम जमानत, नियमित जमानत और सिविल अवमानना से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी। हालांकि मृत्युदंड और पॉक्सो एक्ट से संबंधित मामले इसके दायरे से बाहर रखे गए हैंl जस्टिस नरेंद्र कुमार व्यास की सिंगल बेंच में एससी-एसटी एक्ट के तहत आने वाली अपीलों के साथ बीएनएसएस की धारा 482 और बीएनएस की धारा 528 के तहत दायर याचिकाओं पर सुनवाई होगी। हालांकि एफआईआर निरस्त करने से संबंधित याचिकाएं इस श्रेणी में शामिल नहीं हैं। वहीं, जस्टिस एनके चंद्रवंशी की सिंगल बेंच-3 में सभी आपराधिक अपील, आपराधिक पुनरीक्षण और आपराधिक स्थानांतरण याचिकाओं की सुनवाई होगी।
सिविल अपील और सेवा मामलों का भी हुआ बंटवारा
जस्टिस सचिन सिंह राजपूत की सिंगल बेंच-4 में प्रथम, द्वितीय और सिविल अपील के साथ सिविल मामलों से जुड़ी स्थानांतरण याचिकाएं सुनी जाएंगी। जस्टिस राकेश मोहन पांडेय की बेंच-5 को वर्ष 2023 तक की सेवा संबंधी रिट याचिकाओं, रिट (एल), रिट (टी) और वर्ष 2006 तक की अन्य रिट याचिकाओं की जिम्मेदारी दी गई है। वहीं, अनुच्छेद 227 के तहत दायर रिट याचिकाओं और दोषमुक्ति के खिलाफ दायर अपीलों की सुनवाई जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की बेंच-6 में होगी।
नई और पुरानी सेवा याचिकाओं के लिए अलग व्यवस्था
जस्टिस बिभू दत्त गुरु की बेंच-7 में वर्ष 2024 और उसके बाद की सेवा संबंधी रिट याचिकाओं की सुनवाई होगी। दूसरी तरफ, जस्टिस अमितेंद्र किशोर प्रसाद की सिंगल बेंच-8 में अन्य रिट (सी) याचिकाओं के साथ वर्ष 2023 के बाद के मोटर वाहन दावा मामलों की सुनवाई की जाएगीl
शुक्रवार को विशेष बेंच में इन मामलों की सुनवाई
रोस्टर में कुछ मामलों के लिए विशेष बेंच की व्यवस्था भी की गई है। मुख्य न्यायाधीश की विशेष सिंगल बेंच में प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 2:15 बजे के बाद मध्यस्थता अधिनियम की धारा 11 से जुड़े मामलों की सुनवाई होगी। इसी तरह जस्टिस संजय कुमार जायसवाल की विशेष बेंच शुक्रवार को दोपहर 2:15 बजे के बाद वर्ष 2022 तक के मोटर व्हीकल एक्ट से जुड़े मामलों की सुनवाई करेगी। नए रोस्टर के लागू होने के साथ हाईकोर्ट में मामलों की सुनवाई के लिए बेंचवार जिम्मेदारियां स्पष्ट हो गई हैं। इससे लंबित मामलों को उनकी प्रकृति के अनुसार संबंधित बेंच के समक्ष सुनवाई के लिए रखा जाएगा।