
धमतरी। स्कूल को अनुशासन और जिम्मेदारी की मिसाल माना जाता है, लेकिन शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय बेलौदी में पदस्थ एक व्याख्याता का कथित आचरण विभाग के लिए गंभीर मामला बन गया। शराब के नशे में विद्यालय पहुंचने और बिना अनुमति लंबे समय तक अनुपस्थित रहने के आरोपों की जांच के बाद शिक्षा विभाग ने व्याख्याता नारायण प्रसाद साहू के खिलाफ सख्त कार्रवाई करते हुए उन्हें निलंबित कर दिया है। विभागीय जांच में आरोपों को गंभीर मानते हुए लोक शिक्षण संचालनालय की ओर से निलंबन आदेश जारी किया गया।
शिकायत के बाद शुरू हुई विभागीय जांच
व्याख्याता के खिलाफ शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी, धमतरी के समक्ष की गई थी। शिकायत में उनके विद्यालय में नशे की हालत में पहुंचने और बिना स्वीकृति के अनुपस्थित रहने से संबंधित आरोप लगाए गए थे। मामला सामने आने के बाद विभाग ने जांच कराई और संबंधित तथ्यों व रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की गई। जांच पूरी होने के बाद प्रकरण लोक शिक्षण संचालनालय तक पहुंचा, जहां निलंबन का निर्णय लिया गया।
सरकारी शिक्षक के आचरण पर विभाग ने जताई गंभीर आपत्ति
शिक्षा विभाग ने व्याख्याता के कथित कृत्यों को शासकीय सेवक के पद की गरिमा और जिम्मेदारियों के अनुरूप नहीं माना है। विद्यालय में शराब के नशे में पहुंचना और स्वीकृति के बिना लंबे समय तक ड्यूटी से अनुपस्थित रहना विभागीय अनुशासन के खिलाफ माना गया। शिक्षा विभाग के इस कदम से यह संदेश देने की कोशिश की गई है कि सरकारी स्कूलों में शिक्षकों की उपस्थिति, आचरण और जिम्मेदारी को लेकर किसी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
सिविल सेवा नियमों के तहत निलंबन
प्रकरण में छत्तीसगढ़ सिविल सेवा नियमों के तहत कार्रवाई करते हुए व्याख्याता नारायण प्रसाद साहू को निलंबित किया गया है। निलंबन आदेश जारी होने के बाद अब मामले में विभागीय प्रक्रिया नियमानुसार आगे बढ़ेगी। शिक्षा विभाग की कार्रवाई ने सरकारी विद्यालयों में शिक्षकों के अनुशासन और आचरण को लेकर सख्ती का संकेत दिया है।