
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग जिले में एक बार फिर आतंकियों ने सुरक्षा बलों को निशाना बनाया है। आज अनंतनाग के लाल चौक इलाके में हुए आतंकी हमले में जम्मू-कश्मीर पुलिस के एक जवान की मौत हो गई। हमले में गंभीर रूप से घायल पुलिसकर्मी को तत्काल GMC अनंतनाग अस्पताल ले जाया गया, लेकिन इलाज के दौरान उन्होंने दम तोड़ दिया। घटना के बाद पूरे इलाके को सुरक्षा बलों ने घेर लिया है और हमलावरों की तलाश में व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
यात्रा ड्यूटी पर तैनात थे शहीद जवान
शहीद पुलिसकर्मी की पहचान IRP (इंडिया रिजर्व पुलिस) तीसरी बटालियन के जवान आशिक हुसैन के रूप में हुई है। वह जम्मू-कश्मीर के बडगाम जिले के बीरवाह क्षेत्र के निवासी थे। शुरुआती जानकारी के अनुसार, आशिक हुसैन अमरनाथ यात्रा सुरक्षा ड्यूटी में तैनात पुलिस टीम का हिस्सा थे, तभी उन पर हमला किया गया।
TRF ने हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया
प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) के प्रॉक्सी संगठन द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) ने इस हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा किया है। संगठन की ओर से जारी कथित बयान में कहा गया कि पुलिसकर्मी को पांच गोलियां मारी गईं। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। सुरक्षा एजेंसियां संगठन के दावे और हमले से जुड़े सभी पहलुओं की जांच कर रही हैं।
इलाके में हाई अलर्ट, आतंकियों की तलाश जारी
हमले के तुरंत बाद पुलिस, सेना और अन्य सुरक्षा एजेंसियों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी अभियान शुरू कर दिया। संवेदनशील स्थानों पर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और संदिग्ध गतिविधियों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि हमले में कितने आतंकी शामिल थे और उन्हें किसी स्थानीय नेटवर्क से मदद मिली थी या नहीं।
क्या है TRF?
द रेजिस्टेंस फ्रंट (TRF) को सुरक्षा एजेंसियां पाकिस्तान स्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का प्रॉक्सी संगठन मानती हैं। यह संगठन वर्ष 2019 में जम्मू-कश्मीर के विशेष दर्जे में बदलाव के बाद सक्रिय रूप से सामने आया था। जांच एजेंसियों के अनुसार, TRF का इस्तेमाल आतंकवादी गतिविधियों को स्थानीय स्वरूप देने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लश्कर-ए-तैयबा की पहचान छिपाने के लिए किया जाता रहा है। भारत सरकार ने जनवरी 2023 में गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत TRF को प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन घोषित किया था। सरकार का आरोप है कि यह संगठन आतंकियों की भर्ती, घुसपैठ, लक्षित हत्याओं और अन्य आतंकी गतिविधियों में शामिल रहा है.