कांकेर: छत्तीसगढ़ के कांकेर जिले में तेंदुए का बढ़ता आतंक अब ग्रामीणों के लिए रोज़मर्रा का डर बन चुका है। बीते 6 दिनों में अलग-अलग घटनाओं में 4 लोगों पर तेंदुए के हमले ने पूरे इलाके को दहशत में डाल दिया है। हालात यह हैं कि जैसे ही शाम ढलती है, गांव की गलियां खाली हो जाती हैं और लोग अपने घरों में कैद होने को मजबूर हो जाते हैं। उत्तर बस्तर का यह क्षेत्र पहले से ही घने जंगलों से घिरा हुआ है, लेकिन अब जंगल और इंसानी बस्तियों के बीच की दूरी लगभग खत्म होती दिख रही है।image-2026-06-19T115812.871

लगातार हमलों ने बढ़ाई चिंता, ग्रामीण घायल
सरोना वन परिक्षेत्र के गट्टागुडुम गांव में तेंदुए की लगातार मौजूदगी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। 16 जून को तेंदुए ने गांव में घुसकर एक कुत्ते का शिकार किया, जिसके बाद उसका हौसला और बढ़ गया। इसके बाद अलग-अलग घटनाओं में धनेश कुंजाम, बुधन उइके और फूलबाई पर तेंदुए ने हमला कर उन्हें घायल कर दिया है। ग्रामीणों के शोर मचाने पर किसी तरह उनकी जान बच पाई। इसी बीच 18 जून को नरहरपुर के देवडोंगर गांव में भी एक और ग्रामीण तेंदुए के हमले का शिकार हो गया है। इन घटनाओं ने साफ कर दिया है कि स्थिति सिर्फ डर तक सीमित नहीं है, बल्कि अब यह एक गंभीर सुरक्षा संकट बन चुका है।image-2026-06-19T115945.242

स्थानीय लोगों का कहना है कि जंगलों में भोजन और पानी की कमी के कारण वन्यजीव अब लगातार रिहायशी इलाकों की ओर रुख कर रहे हैं। कांकेर जिला घने जंगलों और पहाड़ियों से घिरा हुआ है, जहां भालू, जंगली सूअर और तेंदुए जैसे जानवरों की मौजूदगी आम है। लेकिन अब यह संतुलन बिगड़ चुका है। वन्यजीव और इंसानों के बीच बढ़ता टकराव गांवों की दिनचर्या को पूरी तरह बदल रहा है। लोग अपने बच्चों को अकेले बाहर भेजने से डर रहे हैं और महिलाओं की आवाजाही भी सीमित हो गई है।image-2026-06-19T120014.882

गट्टागुडुम गांव और आसपास के इलाकों में शाम ढलते ही पूरी तरह सन्नाटा पसर जाता है। जहां पहले बच्चों की आवाजें और लोगों की चहल-पहल होती थी, वहां अब डर और खामोशी का माहौल है। ग्रामीण समूह बनाकर, लाठी-डंडों के सहारे ही जरूरी काम के लिए बाहर निकल रहे हैं। बच्चों की पढ़ाई और रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित हो रही हैं। यह स्थिति धीरे-धीरे एक अनकहे कर्फ्यू में बदलती जा रही है, जहां डर ने आज़ादी को सीमित कर दिया है।image-2026-06-19T120112.531

वन विभाग अलर्ट पर, लेकिन समाधान अब भी सवालों में
घटनाओं के बाद वन विभाग ने इलाके को अलर्ट जोन घोषित कर दिया है। संवेदनशील स्थानों पर कैमरे लगाए गए हैं और रातभर निगरानी की जा रही है। गांवों में मुनादी कर लोगों को सतर्क रहने और अकेले बाहर न निकलने की सलाह दी जा रही है। हालांकि, ग्रामीणों का सवाल है कि इतनी घटनाओं के बाद भी स्थायी समाधान क्यों नहीं निकल पाया। पहले भी इस क्षेत्र में तेंदुए की मौजूदगी और हमलों की घटनाएं सामने आ चुकी हैं, और वन विभाग द्वारा पकड़ने की कार्रवाई भी की गई थी, लेकिन समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई।