
Kidney Disease and Heart Health: किडनी और दिल शरीर के दो ऐसे महत्वपूर्ण अंग हैं, जो एक-दूसरे के कामकाज से गहराई से जुड़े होते हैं। किडनी का मुख्य काम शरीर से विषैले तत्व, अतिरिक्त पानी और नमक को बाहर निकालकर खून को साफ रखना है। साथ ही यह ब्लड प्रेशर को नियंत्रित रखने में भी अहम भूमिका निभाती है। लेकिन जब किडनी ठीक से काम करना बंद कर देती है, तो इसका असर केवल किडनी तक सीमित नहीं रहता, बल्कि दिल की सेहत भी गंभीर रूप से प्रभावित हो सकती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, क्रोनिक किडनी डिजीज (CKD) से जूझ रहे लोगों में हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर और स्ट्रोक जैसी हृदय संबंधी बीमारियों का खतरा सामान्य लोगों की तुलना में काफी अधिक होता है। इसलिए किडनी की बीमारी को केवल एक अंग की समस्या मानना बड़ी भूल हो सकती है।
किडनी खराब होने पर दिल पर क्यों बढ़ता है दबाव?
जब किडनी खून को सही तरीके से फिल्टर नहीं कर पाती, तो शरीर में अतिरिक्त पानी, नमक और विषैले पदार्थ जमा होने लगते हैं। इससे ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है और दिल को खून पंप करने के लिए सामान्य से अधिक मेहनत करनी पड़ती है। लंबे समय तक यह स्थिति बनी रहने पर हृदय की मांसपेशियां कमजोर होने लगती हैं, जिससे हार्ट फेलियर और हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है।
इसके अलावा किडनी की बीमारी शरीर में इलेक्ट्रोलाइट और मिनरल्स का संतुलन भी बिगाड़ सकती है, जो दिल की धड़कनों को प्रभावित कर सकता है। कई मरीजों में एनीमिया और शरीर में सूजन भी विकसित हो जाती है, जिससे हृदय पर अतिरिक्त दबाव पड़ता है।
किन लोगों को सबसे ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है?
विशेषज्ञों का कहना है कि डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, मोटापा या पहले से किडनी की बीमारी से पीड़ित लोगों में हृदय रोगों का खतरा अधिक होता है। ऐसे लोगों को नियमित रूप से किडनी फंक्शन टेस्ट, ब्लड प्रेशर और हार्ट हेल्थ की जांच कराते रहना चाहिए, ताकि किसी भी समस्या का समय रहते पता चल सके।
किडनी खराब होने के शुरुआती संकेत
किडनी की बीमारी शुरुआती चरण में अक्सर बिना किसी स्पष्ट लक्षण के बढ़ती है, इसलिए इसे "साइलेंट डिजीज" भी कहा जाता है। हालांकि समय के साथ कुछ संकेत दिखाई दे सकते हैं, जैसे
- पैरों, टखनों या चेहरे पर सूजन
- बार-बार या बहुत कम पेशाब आना
- पेशाब में झाग या खून दिखाई देना
- लगातार हाई ब्लड प्रेशर
- भूख कम लगना और थकान महसूस होना
- त्वचा में खुजली
- शरीर में कमजोरी या सांस फूलना
इनमें से कोई भी लक्षण लगातार दिखाई दे तो डॉक्टर से तुरंत सलाह लेनी चाहिए।
किडनी और दिल को स्वस्थ रखने के आसान उपाय
दोनों अंगों को स्वस्थ रखने के लिए संतुलित जीवनशैली बेहद जरूरी है। विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि
- संतुलित और फाइबर युक्त आहार लें।
- पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं। (पानी की सही मात्रा व्यक्ति की उम्र, मौसम और स्वास्थ्य स्थिति पर निर्भर करती है। यदि
- किडनी या हार्ट की बीमारी है, तो पानी की मात्रा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही तय करें।)
- ताजे फल और पानी से भरपूर सब्जियों को भोजन में शामिल करें।
- धूम्रपान और तंबाकू से दूरी बनाए रखें।
- बिना डॉक्टर की सलाह के लंबे समय तक दर्द निवारक दवाओं (Painkillers) का सेवन न करें।
- नियमित व्यायाम करें और वजन नियंत्रित रखें।
- ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर को नियंत्रण में रखें।
- डॉक्टर द्वारा दी गई दवाएं समय पर लें और नियमित स्वास्थ्य जांच कराते रहें।
विशेषज्ञों के मुताबिक, किडनी और दिल दोनों की सेहत एक-दूसरे से जुड़ी होती है। इसलिए यदि किडनी की बीमारी का समय रहते इलाज और सही देखभाल की जाए, तो गंभीर हृदय रोगों के खतरे को भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।