लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में स्वाइन फ्लू यानी इन्फ्लुएंजा-ए H1N1 ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। इंदिरानगर की रहने वाली 50 वर्षीय महिला की इलाज के दौरान मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी और बचाव की तैयारियां तेज कर दी हैं। संक्रमण के संभावित खतरे को देखते हुए सिविल अस्पताल और बलरामपुर अस्पताल में अलग आइसोलेशन वार्ड तैयार किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से अपील की है कि बदलते मौसम में सर्दी, खांसी और बुखार को सामान्य वायरल समझकर नजरअंदाज न करें। खासकर सांस लेने में परेशानी, सांस फूलना या ऑक्सीजन का स्तर गिरना जैसे लक्षण दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।

इलाज के दौरान 50 वर्षीय महिला की मौत, संपर्क में आए लोगों की निगरानी
इंदिरानगर निवासी 50 वर्षीय महिला की तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें गंभीर हालत में बलरामपुर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। इसके बाद स्वास्थ्य विभाग की सर्विलांस टीम ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग शुरू कर दी है। स्वास्थ्य विभाग की टीम यह पता लगाने में जुटी है कि महिला हाल के दिनों में किन स्थानों पर गई थीं और उनके संपर्क में कौन-कौन लोग आए थे ? परिजनों को संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने की सलाह दी गई है। साथ ही उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर भी निगरानी रखी जा रही है।

18 बेड का अलग आइसोलेशन वार्ड तैयार
स्वास्थ्य विभाग ने संभावित मरीजों के इलाज के लिए अस्पतालों में विशेष इंतजाम किए हैं। सीएमओ डॉ. एनबी सिंह के मुताबिक, हजरतगंज स्थित सिविल अस्पताल में 12 बेड और बलरामपुर अस्पताल में 6 बेड का अलग आइसोलेशन वार्ड तैयार किया गया है। इन वार्डों में गंभीर मरीजों की जरूरत को देखते हुए ऑक्सीजन, वेंटिलेटर, आवश्यक दवाओं और जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है।

जनवरी से अब तक H1N1 के 13 मामले
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक महीने में लखनऊ में स्वाइन फ्लू के 3 नए मामलों की पुष्टि हुई है। वहीं जनवरी 2026 से अब तक जिले में कुल 13 H1N1 संक्रमित मरीज सामने आ चुके हैं। अधिकांश मरीजों में शुरुआत में सामान्य सर्दी-जुकाम, खांसी और बुखार जैसे लक्षण दिखाई दिए। डॉक्टरों की सलाह पर जांच कराने के बाद कुछ मामलों में H1N1 संक्रमण की पुष्टि हुई।

मौसम बदलते ही क्यों बढ़ता है स्वाइन फ्लू का खतरा?
मौसम में बदलाव के दौरान वायरल संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। H1N1 वायरस मुख्य रूप से संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस लेने के दौरान निकलने वाली बूंदों के जरिए फैल सकता है। संक्रमित सतह को छूने के बाद बिना हाथ धोए आंख, नाक या मुंह को छूने से भी संक्रमण का खतरा हो सकता है। यही वजह है कि विशेषज्ञ बदलते मौसम में व्यक्तिगत स्वच्छता और संक्रमण से बचाव के उपायों को लेकर सतर्क रहने की सलाह देते हैं।

ये लक्षण दिखें तो रहें सावधान
स्वाइन फ्लू के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य वायरल या मौसमी फ्लू जैसे ही दिखाई देते हैं। इनमें मुख्य रूप से

  • तेज बुखार और ठंड लगना
  • लगातार खांसी
  • गले में खराश
  • नाक बहना या नाक बंद होना
  • सिरदर्द और बदन दर्द
  • मांसपेशियों में दर्द
  • अत्यधिक कमजोरी और थकान शामिल हो सकते हैं।

लेकिन अगर बुखार और खांसी के साथ सांस लेने में परेशानी, सांस फूलना, सीने में तकलीफ या ऑक्सीजन स्तर कम होने जैसे संकेत दिखाई दें, तो इसे गंभीरता से लेना चाहिए और बिना देरी किए डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

संक्रमण से बचने के लिए क्या करें?
स्वाइन फ्लू से बचाव के लिए स्वास्थ्य विशेषज्ञ कुछ सामान्य सावधानियां बरतने की सलाह देते हैं। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या रुमाल से ढकें। हाथों को साबुन और पानी से नियमित रूप से साफ करें या जरूरत पड़ने पर सैनिटाइजर का इस्तेमाल करें। सर्दी-जुकाम या बुखार जैसे लक्षण होने पर भीड़भाड़ वाली जगहों पर जाने से बचें और दूसरे लोगों के संपर्क में आने से परहेज करें। इस्तेमाल किए गए टिश्यू को खुले में न फेंकें और आसपास की स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें।

कब तुरंत अस्पताल जाएं?
अगर सामान्य फ्लू जैसे लक्षण लगातार बढ़ रहे हों या सांस लेने में परेशानी, सांस फूलना अथवा ऑक्सीजन कम होने जैसे गंभीर संकेत नजर आएं, तो घरेलू उपचार के भरोसे न रहें। ऐसी स्थिति में तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है। लखनऊ में H1N1 से मौत के बाद स्वास्थ्य विभाग की सक्रियता बढ़ गई है। फिलहाल विभाग संक्रमण की स्थिति पर नजर रखते हुए संभावित मरीजों के लिए अस्पतालों में जरूरी व्यवस्थाएं मजबूत कर रहा है।