
काठमांडू। नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने तबाही की ऐसी तस्वीर छोड़ी है, जिसने पूरे क्षेत्र को झकझोर दिया है। बाढ़ और मलबे के बीच राहत-बचाव अभियान लगातार जारी है, लेकिन जैसे-जैसे प्रभावित इलाकों तक टीमें पहुंच रही हैं, नुकसान का दायरा और बड़ा सामने आ रहा है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, आपदा में अब तक 469 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,400 से अधिक लोग लापता बताए जा रहे हैं। लापता लोगों में बड़ी संख्या विदेशी नागरिकों की भी है। हालात को देखते हुए प्रशासन ने बचाव अभियान तेज कर दिया है और मलबे में फंसे लोगों की तलाश की जा रही है।
288 भारतीयों के लापता होने की जानकारी
नेपाल में आई आपदा के बाद भारत भी अपने नागरिकों को लेकर लगातार संपर्क में है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, लापता लोगों में 288 भारतीय नागरिक शामिल हैं। इनमें एक पावर प्रोजेक्ट से जुड़े 73 लोग भी बताए जा रहे हैं। भारत सरकार नेपाल के अधिकारियों के साथ संपर्क में है और लापता भारतीयों का पता लगाने के लिए हरसंभव सहयोग किया जा रहा है।
नेपाल तक सीमित नहीं रहा आपदा का असर
इस प्राकृतिक आपदा का प्रभाव नेपाल के सीमावर्ती इलाकों से आगे भी देखने को मिला है। तिब्बत में भी नुकसान की जानकारी सामने आई है। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, वहां तीन लोगों की मौत हुई है। वहीं प्रभावित इलाके से सैकड़ों लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें स्थानीय निवासियों के साथ बड़ी संख्या में पर्यटक भी शामिल हैं।
नई झील से फिर बाढ़ का खतरा
आपदा के बाद तिब्बत में एक नए खतरे ने भी प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है। मडस्लाइड के बाद बनी झील में पानी लगातार बढ़ने की आशंका है। मौसम विभाग के अनुमान में अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की संभावना जताई गई है। ऐसे में झील का पानी बढ़ने या तटबंध टूटने पर निचले इलाकों में दोबारा बाढ़ का खतरा पैदा हो सकता है। अधिकारियों ने संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।
ग्लेशियर टूटने से आया फ्लैश फ्लड?
शुरुआती दौर में इस आपदा को लेकर अलग-अलग आशंकाएं जताई गई थीं। बाद में अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) की जानकारी में फ्लैश फ्लड के पीछे ग्लेशियर के ढहने की बात सामने आई। वैज्ञानिक अब सैटेलाइट तस्वीरों और अन्य उपलब्ध आंकड़ों की मदद से घटना की वजहों को समझने में जुटे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि हिमालयी क्षेत्रों में बदलते तापमान और ग्लेशियरों की अस्थिरता भविष्य में ऐसी घटनाओं का खतरा बढ़ा सकती है, हालांकि किसी एक घटना को सीधे जलवायु परिवर्तन से जोड़ने से पहले विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन जरूरी है।
मलबे में जिंदगी की तलाश जारी
सबसे बड़ी चुनौती अब लापता लोगों को ढूंढना है। कई प्रभावित इलाके दुर्गम हैं और बाढ़ के कारण सड़कें तथा संपर्क मार्ग क्षतिग्रस्त हुए हैं। इसके बावजूद राहत टीमें लगातार मलबे और प्रभावित क्षेत्रों में सर्च ऑपरेशन चला रही हैं। 469 मौतों और 1,400 से अधिक लोगों के लापता होने के आंकड़े के साथ नेपाल इस समय एक बड़े मानवीय संकट से जूझ रहा है। आने वाले दिनों में रेस्क्यू अभियान के आगे बढ़ने के साथ ही इस त्रासदी की वास्तविक तस्वीर और साफ होने की उम्मीद है।