
बिलासपुर.जिला शिक्षा अधिकारी (डीईओ) कार्यालय में गड़बड़ियों की फेहरिस्त लंबी होती जा रही है। प्रमोशन और पोस्टिंग में मनमानी के बाद अब अनुकंपा नियुक्ति में भी धांधली सामने आई है। पहली पत्नी के जिंदा रहते दूसरी पत्नी के आवेदन को अपात्र बताकर पहले खारिज किया गया। लेकिन जैसे ही उसका बेटा 18 साल का हुआ, उसी पुरानी फाइल को धूल झाड़कर निकाला गया और उसे चपरासी की नौकरी थमा दी गई। स्थिति यह है कि नवनियुक्त कर्मचारी की सर्विस बुक पर किसी सक्षम अधिकारी के हस्ताक्षर ही मौजूद नहीं हैं।
यह पूरा वाकया तखतपुर बीईओ कार्यालय में पदस्थ रहे सहायक ग्रेड-3 ओमप्रकाश साहू से संबंधित है। 3 जून 2020 को सेवा में रहते हुए उनका निधन हो गया था। परिवार में दो पत्नियां थीं- अनुसुइया बाई और यज्ञ साहू। नियम बताते हैं कि पहली पत्नी के जीवित रहते दूसरी को अनुकंपा का लाभ नहीं दिया जा सकता। शुरुआत में डीईओ दफ्तर ने भी इसी नियम का हवाला देकर दूसरी पत्नी यज्ञ साहू का आवेदन नामंजूर कर दिया था।
कुछ समय बीता। दूसरी पत्नी के बेटे यश साहू ने 18 वर्ष की उम्र पूरी की। इसके बाद प्रमोशन घोटाले में निलंबित हो चुके बाबू सुनील यादव और तत्कालीन डीईओ विजय टांडे ने इस खारिज फाइल को फिर से खोला। सिरगिट्टी हायर सेकेंडरी स्कूल में यश को चपरासी के पद पर पदस्थ कर दिया गया। विभागीय जानकारों के अनुसार, ऐसे पेचीदा मामलों में तहसील या न्यायालय से जारी सक्सेशन सर्टिफिकेट (कानूनी वारिस प्रमाण पत्र) की अनिवार्यता होती है। लेकिन यहां नियमों को किनारे रखकर महज 50 रुपए के स्टाम्प पेपर पर नोटरी कराकर और आपसी रजामंदी के आधार पर फाइल आगे बढ़ा दी गई।
जांच कमेटी की सलाह को भी किया दरकिनार
शिकायत होने पर विभाग ने चार सदस्यीय जांच टीम बनाई थी। इसमें प्राचार्य जितेंद्र खोब्रागड़े, बीईओ शिवराम टंडन, बीईओ भूपेंद्र कौशिक और बाबू गोविंद वैष्णव को शामिल किया गया। टीम ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि सामान्य प्रशासन विभाग (जीएडी) के नियमों में ऐसे प्रकरणों को लेकर स्थिति स्पष्ट नहीं है, इसलिए कानूनी राय लेना उचित होगा। लेकिन तत्कालीन डीईओ और बाबू ने इस अनुशंसा को दरकिनार कर आनन-फानन में नियुक्ति आदेश जारी कर दिया। जांच दल के सदस्य व बिल्हा बीईओ भूपेंद्र कौशिक का कहना है कि समिति ने विधिक सलाह की बात कही थी, उस पर अमल हुआ या नहीं, इसकी उन्हें कोई जानकारी नहीं है।
मुंगेली के 'द्विवेदी कांड' से सबक नहीं
शिक्षा विभाग में अनुकंपा के नाम पर यह कोई नई बात नहीं है। पड़ोसी जिले मुंगेली में भी इसी तरह नियमों के विपरीत जाकर नियुक्तियां की गई थीं, जिसे 'द्विवेदी कांड' के नाम से जाना जाता है। उस प्रकरण में शासन ने सख्त रवैया अपनाते हुए तत्कालीन डीईओ एनके द्विवेदी को बर्खास्त कर दिया था। मुंगेली की उस बड़ी कार्रवाई के बाद भी बिलासपुर डीईओ कार्यालय में नियुक्ति की ऐसी प्रक्रिया अपनाई गई, जिस पर विभागीय कार्यप्रणाली कटघरे में है।