
रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर के पास नवा रायपुर स्थित श्री रावतपुरा सरकार इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च में सीटों की मान्यता बढ़ाने के लिए बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा हुआ है। सीबीआई ने नेशनल मेडिकल कमीशन यानी एनएमसी की टीम को 55 लाख रुपये की रिश्वत देने के मामले में कॉलेज मैनेजमेंट और डॉक्टरों पर बड़ी कार्रवाई की है। इस कॉलेज का संचालन श्री रावतपुरा सरकार लोक कल्याण ट्रस्ट करता है जिसके चेयरमैन रवि शंकर महाराज हैं। सीबीआई की चार्जशीट के बाद अब प्रवर्तन निदेशालय यानी ईडी भी मनी लॉन्ड्रिंग के तहत इस बड़े घोटाले की जांच में जुट गया है।
कॉलेज में मेडिकल की सीटें 150 से बढ़ाकर 250 करनी थीं। इसके लिए 30 जून 2025 को एनएमसी की टीम इंस्पेक्शन के लिए आई थी। इसी दौरान रिश्वतखोरी का यह पूरा खेल पकड़ा गया। सीबीआई ने जुलाई 2025 की शुरुआत में ही इस मामले में 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। पकड़े गए लोगों में एनएमसी इंस्पेक्शन टीम के तीन डॉक्टर शामिल थे। इन डॉक्टरों के नाम डॉ मंजप्पा सी एन डॉ चैत्रा एम एस और डॉ अशोक शेलके हैं। डॉ मंजप्पा इस जांच दल के प्रमुख थे। इनके साथ ही कॉलेज के डायरेक्टर अतुल कुमार तिवारी को भी गिरफ्तार किया गया।
सतीश ए और रविचंद्र के नाम के दो बिचौलियों को भी टीम ने पकड़ा। सीबीआई के मुताबिक 55 लाख रुपये की यह रिश्वत हवाला के जरिए भेजी गई थी। सीबीआई ने जाल बिछाकर 16 लाख 62 हजार रुपये डॉ चैत्रा के पति से और बाकी के 38 लाख 38 हजार रुपये अन्य लोगों से बरामद कर लिए।
सीबीआई जांच में सामने आया कि कॉलेज मैनेजमेंट ने इंस्पेक्शन पास कराने के लिए बड़े पैमाने पर हेराफेरी की थी। मयूर रावल और आर रणदीप नायर जैसे बिचौलियों के जरिए जांच टीम के आने की तारीख और उनके नाम 48 घंटे पहले ही लीक करा लिए गए थे।
निरीक्षण के दिन अस्पताल को भरा हुआ दिखाने के लिए आसपास के गांव वालों को 150 रुपये रोज की दिहाड़ी देकर मरीज की तरह पलंग पर लिटा दिया गया। इसके अलावा कॉलेज में पढ़ाने वालों की कमी छिपाने के लिए बाहर से डॉक्टरों को बुलाकर उन्हें स्थायी स्टाफ बता दिया गया। हाजिरी के लिए बायोमेट्रिक सिस्टम में भी जमकर छेड़छाड़ की गई और अस्पताल की क्षमता को भी बहुत ज्यादा बढ़ाकर दिखाया गया।
अगस्त 2025 में सीबीआई ने रायपुर की स्पेशल कोर्ट में अपनी चार्जशीट पेश कर दी। इस चार्जशीट में 12 लोगों को आरोपी बनाया गया है। इसमें ट्रस्ट के पदाधिकारियों और बिचौलियों के नाम शामिल हैं। सीबीआई ने साफ तौर पर ट्रस्ट के चेयरमैन रवि शंकर महाराज को इस पूरे फर्जीवाड़े का मुख्य सूत्रधार बताया है। सीबीआई की शुरुआती एफआईआर में कुल 35 लोगों के नाम थे जिनमें स्वास्थ्य मंत्रालय और एनएमसी के अधिकारी भी शामिल थे।
@PMOIndia @AmitShahOffice @cbic_india @dir_ed छत्तीसगढ़ में CBI ने मेडिकल कॉलेज में अनियमितता के संबंध सोसाइटी/ ट्रस्ट के पदाधिकारियों और संस्थान के खिलाफ जो चार्ज शीट फाइल की है उस और और तथ्य भेजकर शीघ्र कार्यवाही की मांग की गई है। इन पर एड से भी कार्यवाही की मांग की है। https://twitter.com/i/status/2042299669464887364
सीबीआई की इस कड़ी कार्रवाई के बाद नवंबर 2025 में ईडी ने भी एक्शन तेज कर दिया। ईडी ने मनी लॉन्ड्रिंग कानून के तहत छत्तीसगढ़ मध्य प्रदेश यूपी राजस्थान बिहार गुजरात महाराष्ट्र आंध्र प्रदेश तेलंगाना और दिल्ली समेत 10 राज्यों में 15 से ज्यादा ठिकानों पर छापे मारे। रायपुर में भी कॉलेज और डायरेक्टर अतुल तिवारी के घर पर ईडी की टीम पहुंची। अधिकारियों ने वहां से मोबाइल हार्ड डिस्क और कई अहम डिजिटल सबूत जब्त किए हैं।
यह पूरे देश के कई प्राइवेट मेडिकल कॉलेजों से जुड़ा एक बहुत बड़ा घोटाला है। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए अब राजनीतिक और सार्वजनिक स्तर पर सभी दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग उठ रही है। लोगों का कहना है कि सारे तथ्य सामने रखकर केस में तेजी लाई जाए और शिक्षा के नाम पर धंधा करने वालों पर ईडी और सीबीआई सख्त से सख्त एक्शन ले। मामले की जांच अभी जारी है और आगे सप्लीमेंट्री चार्जशीट में कुछ और बड़े खुलासे हो सकते हैं।




