
पेंड्रा। छत्तीसगढ़ के पेंड्रा-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर बुधवार को उस समय हड़कंप मच गया, जब जंगल से भटककर एक दुर्लभ सफेद भालू रिहायशी इलाके और मुख्य सड़क पर पहुंच गया। पटियाला हाउस के पास भालू को सड़क पर घूमते देखकर राहगीरों में अफरा-तफरी का माहौल बन गया। कुछ देर के लिए सड़क से गुजर रहे लोग ठिठक गए और वाहनों की आवाजाही भी प्रभावित हुई। इस दौरान कई लोगों ने अपने मोबाइल फोन से भालू का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया। अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है।
पेंड्रा-बिलासपुर मार्ग पर अचानक नजर आया सफेद भालू
जानकारी के अनुसार, बुधवार को पेंड्रा-बिलासपुर मुख्य मार्ग पर पटियाला हाउस के पास लोगों ने एक सफेद रंग के भालू को घूमते हुए देखा। आमतौर पर काले या गहरे भूरे रंग के भालू दिखाई देते हैं, लेकिन पूरी तरह सफेद रंग का भालू देखकर लोग हैरान रह गए। जंगल से निकलकर आबादी वाले इलाके और व्यस्त सड़क तक पहुंचने के कारण आसपास के लोगों में चिंता बढ़ गई।
सड़क पर भालू की मौजूदगी के कारण राहगीर कुछ समय के लिए रुक गए। लोग दूर से भालू को देखते रहे और कई लोगों ने इस दुर्लभ वन्यजीव की तस्वीरें और वीडियो अपने मोबाइल में कैद कर लिए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद क्षेत्र में सफेद भालू को लेकर चर्चा तेज हो गई है।
क्या है सफेद भालू के रंग का रहस्य?
वन विशेषज्ञों के अनुसार, सफेद रंग का यह भालू किसी अलग प्रजाति का होना जरूरी नहीं है। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, यह भारतीय स्लॉथ बियर यानी रीछ का ही एक दुर्लभ रंग वाला रूप हो सकता है। इसके शरीर का रंग सामान्य भालुओं से अलग होने के पीछे आनुवंशिक कारण हो सकते हैं।
रंग में इस तरह के बदलाव को एल्बिनिज्म (Albinism) कहा जाता है। यह एक आनुवंशिक स्थिति है, जिसमें शरीर में मेलेनिन नामक रंगद्रव्य का निर्माण बहुत कम या नहीं के बराबर होता है। इसके कारण त्वचा, बालों और आंखों के रंग में असामान्य बदलाव दिखाई दे सकता है। हालांकि, केवल सफेद रंग के आधार पर किसी वन्यजीव में एल्बिनिज्म की पुष्टि नहीं की जा सकती। इसके लिए विशेषज्ञों द्वारा वैज्ञानिक जांच आवश्यक होती है।
बताया जा रहा है कि इससे पहले भी मरवाही वनमंडल के जंगलों में इस सफेद भालू की मौजूदगी देखी जा चुकी है। ऐसे में क्षेत्र में इसकी उपस्थिति वन्यजीव प्रेमियों और स्थानीय लोगों के लिए विशेष आकर्षण का विषय बनी हुई है।
वन विभाग अलर्ट, भालू को जंगल में भेजने की कोशिश
घटना की जानकारी मिलते ही वन विभाग की टीम सतर्क हो गई और मौके पर पहुंचकर भालू की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू कर दी। विभाग का मुख्य उद्देश्य भालू को बिना नुकसान पहुंचाए सुरक्षित रूप से दोबारा घने जंगल की ओर भेजना है।
रिहायशी इलाके और मुख्य सड़क पर जंगली जानवर की मौजूदगी से मानव-वन्यजीव संघर्ष की आशंका बढ़ जाती है। यदि लोग भालू के करीब जाने, उसका पीछा करने या उसे घेरने की कोशिश करते हैं, तो वह घबराकर आक्रामक हो सकता है। इससे लोगों और वन्यजीव दोनों की जान को खतरा हो सकता है।
इसी को ध्यान में रखते हुए वन विभाग की टीम भालू की गतिविधियों की निगरानी कर रही है और उसे सुरक्षित तरीके से जंगल की ओर मोड़ने का प्रयास कर रही है।
वन विभाग की लोगों से अपील, भालू से बनाए रखें दूरी
वन अधिकारियों ने स्थानीय निवासियों और राहगीरों से अपील की है कि वे भालू को देखकर उसके पास जाने की कोशिश न करें। उसकी तस्वीर या वीडियो बनाने के लिए नजदीक जाना, भीड़ लगाना, शोर मचाना या उसे घेरना खतरनाक साबित हो सकता है।
लोगों से यह भी कहा गया है कि वे वन विभाग के निर्देशों का पालन करें और भालू दिखाई देने पर तत्काल संबंधित अधिकारियों को सूचना दें। सड़क पर भालू की मौजूदगी के दौरान वाहन चालकों को सावधानी बरतनी चाहिए और वन विभाग की अनुमति या निर्देश के बिना उसके करीब नहीं जाना चाहिए।
फिलहाल इस दुर्लभ सफेद भालू की मौजूदगी ने पेंड्रा-बिलासपुर क्षेत्र में लोगों का ध्यान खींचा है। अब वन विभाग की प्राथमिकता उसे सुरक्षित रूप से जंगल में वापस पहुंचाना और किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकना है।