जय शंकर पाण्डेय 

रायपुर। छत्तीसगढ़ के आसमान से इन दिनों आग बरस रही है। नौतपा की आधिकारिक शुरुआत से पहले ही सूरज के तेवर इतने जानलेवा हो चुके हैं कि प्रकृति अब त्राहिमाम कर रही है। सबसे विचलित करने वाली तस्वीर कोरबा जिले के पाली से आई है जहां गर्मी के खौफनाक टॉर्चर ने बेजुबानों की सामूहिक जान ले ली है। नौकोनिया तालाब के किनारे जिन ऊंचे पेड़ों पर फरवरी मार्च से हजारों प्रवासी चमगादड़ों का खूबसूरत बसेरा होता था आज वहां मौत का वीभत्स सन्नाटा पसरा है।

पेड़ों से गिरती मौत.....

मात्र एक दिन में 150 से ज्यादा चमगादड़ हीट स्ट्रोक का शिकार होकर पेड़ों से जमीन पर ऐसे गिरे जैसे किसी ने उनका कत्लेआम कर दिया हो। जो तालाब सुबह शाम इन बेजुबानों की जलक्रीड़ा से गुलजार रहता था आज वहां मृत पक्षियों का ढेर लगा है। गर्मी से बेहाल होकर तड़पते इन जीवों का दर्द देखकर किसी भी संवेदनशील इंसान का कलेजा कांप जाए। चमगादड़ 38 डिग्री तक का तापमान सह सकते हैं लेकिन 42 डिग्री पार करता तापमान इन जीवों के लिए सीधा मौत का फरमान बन गया है।

सरकार के लिए सीधी चेतावनी

प्रकृति ने इन बेजुबानों की दर्दनाक मौत के जरिए एक बहुत बड़ा और खतरनाक रेड अलर्ट जारी किया है। यह महज कुछ चमगादड़ों की मौत का साधारण आंकड़ा नहीं है बल्कि यह हमारे पर्यावरण के चरमराने की खौफनाक शुरुआत है। नीति नियंताओं और सरकार को यह चेतावनी स्पष्ट रूप से समझनी होगी। अगर सरकारें अब भी वातानुकूलित कमरों से बाहर निकलकर हीट एक्शन प्लान और पर्यावरण संरक्षण पर युद्ध स्तर पर काम नहीं करेंगी तो वह दिन दूर नहीं जब सड़कों और चौराहों पर इंसान भी इसी तरह काल के ग्रास बनेंगे। आज आसमान से बेजुबान गिर रहे हैं कल लू के ये जानलेवा थपेड़े आम आदमी की सांसें छीन लेंगे। कंक्रीट के जंगलों के विस्तार और पेड़ों की बेतहाशा कटाई का नतीजा आज हमारे सामने है।

खेतों में झुलसती फसलें.......

गर्मी का यह खौफनाक कहर सिर्फ जीवों तक सीमित नहीं है। ग्रामीण इलाकों में खेती किसानी पूरी तरह तबाह हो रही है। खेतों में लहलहाती मौसमी सब्जियां और फसलें सूरज की तपिश से पूरी तरह झुलस गई हैं। किसानों की महीनों की गाढ़ी कमाई देखते ही देखते सूखी मिट्टी में तब्दील हो रही है। प्रदेश के तापमान के आंकड़े बेहद डराने वाले हैं। अधिकांश शहरों में पारा 40 से 45 डिग्री के बीच बना हुआ है। दुर्ग पूरा जल रहा है जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री पहुंच गया है। राजधानी रायपुर में 44.3 डिग्री की झुलसाने वाली लू चल रही है। बस्तर का जगदलपुर भी सामान्य से लगभग 5 डिग्री अधिक 43.1 डिग्री की भीषण तपन सह रहा है। सरकार और वन विभाग भले ही हालात पर नजर रखने के दावे करें लेकिन जमीनी हकीकत भयावह है। अगर हमने अब भी प्रकृति के इस मार्मिक रुदन को अनसुना किया तो तय मानिए कि अगली बारी इंसानों की ही है।