रायपुर। राजधानी रायपुर में पुलिस ने इंटर-स्टेट साइबर ठगी नेटवर्क का बड़ा खुलासा करते हुए फर्जी कॉल सेंटर गिरोह का भंडाफोड़ किया है। मंगलवार-बुधवार की दरमियानी रात की गई कार्रवाई में पुलिस ने शहर के दो प्रमुख कमर्शियल कॉम्प्लेक्स पर छापेमारी कर 41 आरोपियों को गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया है कि इस पूरे रैकेट के तार अहमदाबाद से जुड़े हैं और मास्टरमाइंड अभी फरार हैं।
पुलिस के अनुसार, गिरोह का संचालन अहमदाबाद निवासी विकास शुक्ला और संजय शर्मा कर रहे थे, जो समय-समय पर रायपुर आकर नेटवर्क को निर्देश देते और फिर वापस लौट जाते थे। आरोपियों ने शहर के पिथालिया कॉम्प्लेक्स और अंजनी टावर में ऑफिस किराए पर लेकर कॉल सेंटर संचालित किया, वहीं ‘पाम बेलागियो’ में लग्जरी फ्लैट लेकर ऑपरेशन को मैनेज किया जाता था। अब पुलिस इन मास्टरमाइंड की तलाश में जुटी है और मकान मालिकों से भी पूछताछ की तैयारी कर रही है।

पूछताछ में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि यह गिरोह अमेरिकी नागरिकों को निशाना बनाता था। भारत के समय अनुसार रात 8 बजे से सुबह 7 बजे तक सक्रिय रहकर आरोपी अमेरिका के बैंक ग्राहकों को कॉल करते थे और उन्हें CIBIL स्कोर खराब होने या लोन किस्त बकाया होने का डर दिखाकर उनकी बैंक डिटेल हासिल कर लेते थे। इसके बाद चाइनीज ऐप के जरिए ऑनलाइन चेक जनरेट कर लाखों डॉलर की ठगी को अंजाम दिया जाता था।
इस नेटवर्क में काम करने वाले युवाओं को खास ट्रेनिंग दी जाती थी। अधिकांश कर्मचारी 12वीं पास थे और अंग्रेजी में कमजोर होने के बावजूद हिंदी में लिखी स्क्रिप्ट पढ़कर विदेशी ग्राहकों से बात करते थे। जटिल सवाल आने पर कॉल तुरंत सीनियर अधिकारियों को ट्रांसफर कर दी जाती थी। गिरोह में मैनेजर स्तर के आरोपियों को 30 हजार रुपए तक और कॉलर्स को 15-20 हजार रुपए तक वेतन दिया जाता था।
पुलिस ने इस मामले में तीन मुख्य प्रभारियों रोहित यादव, सौरभ सिंह और गौरव यादव को गिरफ्तार किया है। फिलहाल, फरार मास्टरमाइंड की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन व अंतरराष्ट्रीय कनेक्शन की जांच की जा रही है। यह कार्रवाई राज्य में बढ़ते साइबर अपराधों पर लगाम लगाने की दिशा में बड़ी सफलता मानी जा रही है।





