रायपुर.राजधानी में कल होने वाले IPL 2026 (RCB vs MI) मैच का बुखार फैंस के सिर चढ़कर बोल रहा है। लेकिन इस हाई-वोल्टेज मैच के पीछे एक बहुत बड़ा 'काला खेल' चल रहा है। असली मैच स्टेडियम की पिच पर नहीं, बल्कि शहर के आउटर इलाकों में स्थित लग्जरी फार्महाउसों, रिसॉर्ट्स और होटलों में खेला जाना है। सट्टा माफियाओं ने पूरे शहर को अपनी गिरफ्त में ले लिया है। दूसरी ओर, आयोजनकर्ता और RCB के स्पॉन्सर की दादागिरी के चलते टिकटों की भारी ब्लैक मार्केटिंग हो रही है, जिसमें छत्तीसगढ़ के आम लोगों और माननीयों की घोर उपेक्षा की जा रही है।

 

सट्टा माफियाओं का 'कैंसर सफेदपोशों का खुला संरक्षण

 

छत्तीसगढ़ पुलिस की लगातार कार्रवाइयों के बावजूद सट्टा माफियाओं का हौसला बुलंद है। छुटभैये नेताओं और रसूखदार होटल मालिकों की शह पर बड़े खाईवाल अपना सिंडिकेट चला रहे हैं।

 

 ये गैंग बन चुके हैं नासूर: खेमानी और ममदानी परिवार, शर्मा परिवार, अनिल जैसिंघानी (आलू), बाबू पठान, आशु शर्मा और इमरान खान का गैंग। इन सिंडिकेट्स ने छत्तीसगढ़ में कैंसर की तरह अपने एजेंट फैला दिए हैं।

 

अंडरग्राउंड होकर कर रहे ऑपरेट: पुलिस की भनक लगते ही प्रदेश के बड़े सट्टा कारोबारी अपने परिवार के साथ अंडरग्राउंड हो गए हैं। अब ये गोवा, हैदराबाद, पुणे और मुंबई जैसे बड़े शहरों के लग्जरी होटलों से अपना अवैध कारोबार बेखौफ चला रहे हैं। प्रदेश के युवाओं का पैसा इस सट्टे में डूब रहा है।

 

टिकटों के नाम पर दिनदहाड़े लूट सन फार्मा पर गंभीर आरोप

 

आयोजनकर्ता 'सन फार्मा' को स्टेडियम में मनमाने ढंग से विज्ञापन लगाकर पैसा कमाने की खुली छूट दे दी गई है, जिससे राज्य सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व का नुकसान होने की आशंका है। ऑनलाइन साइट्स पर टिकट 'सोल्ड आउट' दिखा रहे हैं, लेकिन अंदरखाने बड़े पैमाने पर टिकटों की कालाबाजारी जारी है। कुछ चुनिंदा रसूखदार IAS-IPS अफसरों को खुश करने के लिए मुफ्त पास बांटे गए हैं, जबकि सत्ताधारी दल के विधायकों, सांसदों और आम जनता को धक्के खाने पड़ रहे हैं।

 

बेंगलुरु की तरह यहां भी RCB स्पॉन्सर की दादागिरी

RCB का यह मैच मूल रूप से बेंगलुरु में होना था। लेकिन, वहां टीम और स्पॉन्सर की मनमानी के कारण कर्नाटक के सीएम ने राज्य के संसाधनों के दोहन और स्थानीय नेताओं की उपेक्षा पर सख्त स्टैंड लेते हुए मैच रद्द कर दिया था। अब यही रवैया रायपुर में दोहराया जा रहा है। राज्य सरकार से सारी मुफ्त सुविधाएं और सुरक्षा लेने के बाद भी सीएम आवास और बड़े अफसरों को बमुश्किल 20 से 50 पास देकर चलता कर दिया गया। यह छत्तीसगढ़ के मूल निवासियों और जनप्रतिनिधियों का सीधा तिरस्कार है।

 

पुलिस की गिरफ्त से बाहर क्यों हैं ये चेहरे?

 

सबसे बड़ा सवाल यह है कि बाबू पठान, इरफान उर्फ इमो और अनिल जैसिंघानी (आलू) जैसे सटोरिए अब तक पुलिस की पकड़ से बाहर क्यों हैं? शहर के आउटर के रिसॉर्ट और फार्म हाउस मालिक बिना किसी खौफ के इन अवैध धंधों को पनाह दे रहे हैं। पुलिस की ताबड़तोड़ कार्रवाइयों के बावजूद सट्टा माफियाओं का नेटवर्क कंट्रोल से बाहर है। आखिर इन्हें किस

का संरक्षण प्राप्त है?