
धरमजयगढ़। रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ क्षेत्र के पहाड़ी इलाकों में सरकारी राशन वितरण व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की परेशानी सामने आई है। ग्राम पंचायत बकालो के अंतर्गत आने वाले नागरतेन्दु और लोटान गांव के ग्रामीणों का आरोप है कि वे राशन लेने के लिए करीब 2 किलोमीटर पहाड़ी रास्ता तय कर नीचे आते हैं, लेकिन पिछले 3-4 दिनों से राशन दुकान के चक्कर लगाने के बावजूद उन्हें खाद्यान्न नहीं मिल पा रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक, राशन लेने के लिए उन्हें पहाड़ से उतरकर दुकान तक पहुंचना पड़ता है। यह सफर उनके लिए आसान नहीं है। इसके बावजूद जब वे दुकान तक पहुंचते हैं तो कथित तौर पर उन्हें तत्काल राशन देने के बजाय ‘आज नहीं, कल आना’ कहकर वापस भेज दिया जाता है। लगातार कई दिनों तक ऐसा होने से ग्रामीणों की परेशानी बढ़ गई है।
पहाड़ से उतरना ही बड़ी चुनौती, ऊपर से राशन के लिए बार-बार चक्कर
नागरतेन्दु और लोटान पहाड़ी क्षेत्र में बसे गांव हैं। इन इलाकों में रहने वाले ग्रामीणों को रोजमर्रा की जरूरतों के लिए कई बार पहाड़ी रास्तों से नीचे उतरना पड़ता है। राशन जैसी जरूरी खाद्य सामग्री लेने के लिए भी उन्हें इसी रास्ते से सफर करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि करीब 2 किलोमीटर का रास्ता भले ही दूरी के लिहाज से ज्यादा न लगे, लेकिन पहाड़ी क्षेत्र होने के कारण इसे तय करने में समय और मेहनत दोनों लगते हैं। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों के लिए यह आवाजाही और कठिन हो सकती है। ऐसे में राशन दुकान तक पहुंचने के बाद यदि खाद्यान्न उपलब्ध नहीं होता या वितरण नहीं हो पाता, तो ग्रामीणों को दोबारा उसी कठिन रास्ते से लौटना पड़ता है। इसके बाद अगले दिन फिर राशन मिलने की उम्मीद में दुकान तक आना पड़ता है।
3-4 दिनों से दुकान के लगा रहे चक्कर
ग्रामीणों के अनुसार, वे पिछले 3-4 दिनों से लगातार राशन लेने के लिए दुकान पहुंच रहे हैं, लेकिन अभी तक उन्हें राशन नहीं मिल सका है। ग्रामीणों का दावा है कि हर बार उन्हें किसी न किसी वजह से बाद में आने के लिए कहा जा रहा है। ग्रामीणों के मुताबिक, उन्हें ‘आज नहीं तो कल’ राशन मिलने की बात कही जा रही है। इसी उम्मीद में वे बार-बार दुकान पहुंच रहे हैं। लेकिन कई दिन गुजर जाने के बाद भी राशन नहीं मिलने से अब उनके सामने रोजमर्रा के भोजन की जरूरत को लेकर चिंता बढ़ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि जब वे इतनी दूर और कठिन रास्ता तय करके राशन लेने आते हैं, तो उन्हें पहले से स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए कि दुकान में राशन उपलब्ध है या नहीं और वितरण किस दिन किया जाएगा।
राशन नहीं मिलने से बढ़ी नाराजगी
सरकारी राशन गरीब और जरूरतमंद परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण खाद्य सुरक्षा व्यवस्था का हिस्सा है। ऐसे में ग्रामीणों का कहना है कि राशन वितरण में किसी तरह की देरी होने पर सबसे ज्यादा परेशानी उन परिवारों को होती है, जिनके पास वैकल्पिक रूप से खाद्यान्न खरीदने की आर्थिक क्षमता सीमित है। नागरतेन्दु और लोटान के ग्रामीणों की परेशानी सिर्फ राशन नहीं मिलने तक सीमित नहीं है। उनका कहना है कि पहाड़ी रास्ते से बार-बार नीचे आना-जाना अपने आप में एक बड़ी चुनौती है। यदि एक बार आने पर राशन नहीं मिलता, तो अगले दिन फिर वही दूरी तय करनी पड़ती है।
व्यवस्था पर उठ रहे सवाल
ग्रामीणों की शिकायत ने पहाड़ी और दूरस्थ इलाकों में राशन वितरण व्यवस्था की पहुंच और प्रबंधन को लेकर सवाल खड़े किए हैं। सवाल यह भी है कि यदि राशन दुकान में खाद्यान्न उपलब्ध नहीं है या वितरण किसी कारण से रोका गया है, तो ग्रामीणों को इसकी पूर्व सूचना क्यों नहीं मिल पा रही है? दूरस्थ इलाकों में रहने वाले हितग्राहियों के लिए राशन वितरण की तारीख, उपलब्ध स्टॉक और वितरण व्यवस्था की स्पष्ट जानकारी समय पर मिलना महत्वपूर्ण है। इससे ग्रामीणों को बेवजह लंबी दूरी तय कर दुकान तक आने से बचाया जा सकता है।
अब ग्रामीणों को राशन मिलने का इंतजार
नागरतेन्दु और लोटान गांव के ग्रामीण राशन मिलने का इंतजार कर रहे हैं। उनका कहना है कि वे कई दिनों से दुकान के चक्कर लगा रहे हैं और हर बार उम्मीद लेकर पहुंचते हैं कि इस बार राशन मिल जाएगा। ग्रामीणों ने संबंधित अधिकारियों से मामले का संज्ञान लेने और राशन वितरण की व्यवस्था सुचारु कराने की मांग की है। हालांकि, राशन वितरण में देरी की वास्तविक वजह क्या है और दुकान में खाद्यान्न की उपलब्धता की स्थिति क्या है, इस संबंध में संबंधित विभाग या राशन दुकान संचालक का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। ग्रामीणों की मांग है कि उन्हें अनावश्यक रूप से बार-बार पहाड़ से उतरकर राशन दुकान तक न आना पड़े और तय व्यवस्था के अनुसार समय पर खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाए।