कोलकाता। पश्चिम बंगाल में दुर्गापूजा और खान-पान को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के बीच भाजपा नेता शुभेंदु अधिकारी का एक वीडियो चर्चा में आ गया है। कौशिकी अमावस्या के अवसर पर कालीघाट स्थित मां काली मंदिर पहुंचे शुभेंदु अधिकारी वहां भोग ग्रहण करते नजर आए। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में उनकी थाली में मछली का सिर, फ्राइड फिश और बसंती पुलाव दिखाई दे रहा है।

कालीघाट पहुंचे थे शुभेंदु अधिकारी
शुभेंदु अधिकारी ने कौशिकी अमावस्या के मौके पर कालीघाट मंदिर में पूजा-अर्चना की। इसके बाद उन्होंने मंदिर परिसर में बैठकर भोग ग्रहण किया। कालीघाट की पारंपरिक भोग व्यवस्था में मछली का शामिल होना बंगाल की शाक्त परंपरा से जुड़ा हुआ माना जाता है। वीडियो सामने आने के बाद बंगाल की राजनीति में इसे लेकर चर्चा तेज हो गई है। खासतौर पर ऐसे समय में जब धार्मिक आयोजनों के दौरान मांसाहारी भोजन को लेकर राजनीतिक बयानबाजी और सोशल मीडिया पर बहस चल रही है।

बागेश्वर बाबा के बयान के बाद बढ़ी थी बहस
दरअसल, दुर्गापूजा के दौरान नॉन-वेज भोजन को लेकर बागेश्वर धाम के धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जुड़ा बयान चर्चा में रहा था। उनके बयान को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इसके बाद बंगाल में धार्मिक परंपराओं और खान-पान की आदतों को लेकर बहस ने राजनीतिक रंग ले लिया। अब शुभेंदु अधिकारी के कालीघाट में मछली वाला भोग ग्रहण करने की तस्वीर और वीडियो ने इसी बहस को फिर चर्चा में ला दिया है।  

बंगाल की धार्मिक परंपराओं में मछली की अलग पहचान
बंगाल में भोजन और धार्मिक परंपराओं का संबंध काफी पुराना है। खासतौर पर शाक्त परंपरा से जुड़े कुछ मंदिरों में मछली को भोग का हिस्सा बनाए जाने की परंपरा रही है। कालीघाट भी ऐसी धार्मिक परंपराओं के लिए जाना जाता है। यही वजह है कि शुभेंदु अधिकारी की भोग ग्रहण करते हुए तस्वीर को महज खान-पान के वीडियो के बजाय राजनीतिक नजरिए से भी देखा जा रहा है। सोशल मीडिया पर इसे लेकर समर्थकों और विरोधियों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं।

सोशल मीडिया पर छिड़ी नई बहस
शुभेंदु अधिकारी के मछली वाला भोग खाने के वीडियो के बाद एक बार फिर सवाल उठने लगा है कि धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत खान-पान की पसंद को राजनीति से किस हद तक जोड़ा जाना चाहिए। फिलहाल, इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल में धर्म, परंपरा और राजनीति के बीच चल रही बहस को एक नया विषय जरूर दे दिया है।