बिलासपुर ।बिलासपुर जिले के बहुचर्चित 17 करोड़ रुपये के सर्पदंश मुआवजा घोटाले में जांच की दिशा अब कोटा, रतनपुर और बेलगहना क्षेत्र के ग्रामीण इलाकों की तरफ मुड़ गई है। सूत्रों के अनुसार, इन क्षेत्रों के टाटीधार, कुरदुर और आसपास के गांवों से कई नए तथ्य सामने आए हैं, जिनके जरिए सरकारी राशि का गबन किया गया।

बेलगहना क्षेत्र से दलालों का एक नया नेटवर्क उजागर हुआ है। जानकारी के अनुसार पीला राम जोशी, दुर्गा बघेल, पंच राम, भानु और सूरज मिश्रा के नाम सामने आए हैं। बताया जा रहा है कि इस पूरे प्रकरण में ये सभी दलाल (बिचौलिए) के रूप में काम कर रहे थे। वहीं, इसी इलाके के मृतक कमलेश सोनवानी और रोहन जोशी की मौत का मामला भी सामने आया है। सूत्रों के मुताबिक, इन दोनों मृतकों को सिम्स (CIMS) अस्पताल में भर्ती होना दर्शाया गया था, जबकि इनका पोस्टमार्टम बेलगहना में किया गया है। इस तरह फर्जी पंचनामे, गलत पोस्टमार्टम रिपोर्ट और झूठे दस्तावेजों के आधार पर बड़ा खेल किया गया। सिर्फ टाटीधार ग्राम पंचायत में ही करीब 10 से 15 लोगों के नाम पर फर्जी तरीके से मुआवजे की फाइलें तैयार होने की बात सामने आ रही है।

एडीएम और एसडीएम की भूमिका पर नजर

मुआवजे में हुए इस भारी भ्रष्टाचार की आंच प्रशासनिक महकमे तक पहुंच चुकी है। तहसील और एसडीएम कार्यालय के तीन लिपिकों — नरेंद्र कौशिक, हरिशंकर राठौर और गरीब राम बिंझवार — की गिरफ्तारी के बाद अब बड़े अधिकारी जांच के दायरे में हैं। पुलिस यह जानने का प्रयास कर रही है कि एडीएम, एसडीएम, तहसीलदार और पटवारी के हस्ताक्षर व अनुशंसा के बिना करोड़ों रुपये की राशि कैसे जारी हो गई। दस्तावेजों में हुई इस हेराफेरी के आधार पर अब संबंधित एडीएम, एसडीएम और तहसीलदारों की कार्यप्रणाली की भी सघन जांच हो रही है।

सिम्स के पांच अन्य चिकित्सक रडार पर, 14 जा चुके हैं जेल

पुलिस जांच में सिम्स की पूर्व डॉक्टर प्रियंका सोनी, अधिवक्ता, बैंककर्मी, मुंशी और दलालों के संगठित गिरोह का पर्दाफाश हुआ है। मंगलवार देर रात दो नगर सैनिकों की गिरफ्तारी के साथ इस मामले में अब तक तीन लिपिकों और तीन अधिवक्ताओं सहित कुल 14 लोग गिरफ्तार किए जा चुके हैं। सिम्स के और कई डॉक्टर संदेह के घेरे में हैं। पुलिस अब सिम्स के पांच अन्य चिकित्सकों से पूछताछ की तैयारी कर रही है। वहीं, मुख्य षड़यंत्रकर्ता बताया जा रहा अधिवक्ता श्रवण वस्त्रकार अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है।

431 मामलों में हड़पे 17 करोड़

जिले में वर्ष 2021 से 2024 के बीच सामान्य मौतों को सर्पदंश से मौत बताकर कुल 431 प्रकरणों में 17 करोड़ 24 लाख रुपये का मुआवजा उठाया गया। सिम्स अस्पताल की कूटरचित पोस्टमार्टम रिपोर्ट और गलत पते के आधार पर फांसी, हार्ट अटैक या आत्महत्या जैसी मौतों को सर्पदंश बताया गया और हर मामले में चार-चार लाख रुपये की सरकारी राशि निकाली गई। ग्रामीण इलाकों से नए नाम सामने आने के बाद अब इस आंकड़े में और बढ़ोतरी होने की संभावना जताई जा रही है।