सूबे के मुखिया के विभाग में अफसरशाही का खुला खेल नियम विरुद्ध रोके गए करोड़ों के बिल

 रायपुर। जल संसाधन विभाग महानदी भवन नवा रायपुर द्वारा 24 अक्टूबर 2026 को जारी एक स्थानांतरण आदेश ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के विभाग में हावी अफसरशाही की पोल खोल दी है। उप सचिव रवीन्द्र मेढेकर के डिजिटल हस्ताक्षर से 15 अभियंताओं के तबादले का आदेश ईएसटीबी 38140 जारी होते ही एमआईएस प्रकोष्ठ के प्रभारी अधीक्षण अभियंता संजय पाठक ने नियम विरुद्ध तरीके से तत्कालीन कार्यपालन अभियंताओं की ऑनलाइन भुगतान आईडी बंद कर दी। बिना विधिवत कार्यभार हस्तांतरण और बैंक में नए आहरण अधिकारी के हस्ताक्षर सत्यापित हुए बिना ही आईडी ब्लॉक होने से संभागों में ठेकेदारों वेंडरों और सप्लायरों के करोड़ों रुपये के भुगतान पूरी तरह से ठप हो गए हैं।

बिना सचिव के आदेश के मौखिक फरमान पर चला चाबुक 

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विभागीय सूत्रों के अनुसार स्थानांतरण आदेश जारी होने के तुरंत बाद संबंधित संभागों के ऑनलाइन भुगतान एकतरफा रोक दिए गए। न तो कार्यभार ग्रहण करने वाले अधिकारी पहुंचे थे और न ही कोई चार्ज शीट तैयार हुई थी। जब प्रभावित कार्यपालन अभियंताओं ने इस एकतरफा कार्रवाई पर आपत्ति दर्ज कराई तो उन्हें एमआईएस प्रभारी संजय पाठक द्वारा मौखिक रूप से बताया गया कि यह कार्रवाई सचिव के आदेश से की गई है। विभाग में ऐसा कोई भी लिखित आदेश मौजूद नहीं है जिससे अधिकारी अब संजय पाठक के इस कदम को तानाशाही बता रहे हैं। स्थापित विभागीय प्रक्रिया के अनुसार नया कार्यपालन अभियंता जब चार्ज लेने पहुंचता है तब दोनों अधिकारी कैश बुक बंद कर रिपोर्ट तैयार करते हैं। इसके बाद वरिष्ठ कार्यालयों और जिला कोषालय को सूचना दी जाती है और बैंक में नए अधिकारी के हस्ताक्षर सत्यापित होने के बाद ही पुरानी आईडी बंद की जाती है। इस बार इस पूरी प्रक्रिया को दरकिनार कर दिया गया।

वर्षा ऋतु में भरोसे पर कराए गए कार्यों का फंसा पेमेंट

इस मनमानी ने विभाग के सामने एक बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। पिछले कुछ महीनों से विभाग में आवंटन का भारी संकट चल रहा था। वर्षा ऋतु में बांधों और नहरों की मरम्मत के लिए जब फंड नहीं था तब कई कार्यपालन अभियंताओं ने ठेकेदारों से आपसी भरोसे यानी गुड फेथ पर काम कराए थे। अब जब विभाग में आवंटन आया तो उसी के साथ तबादला आदेश आ गया और तुरंत आईडी बंद कर दी गई। जिन अधिकारियों ने काम कराए वे अब भुगतान करने में असमर्थ हो गए हैं और ठेकेदार अपने पैसे के लिए दफ्तरों के चक्कर काट रहे हैं।

रिटायरमेंट से सिर्फ सात दिन पहले नियम विरुद्ध तबादला

इस पूरे प्रकरण में मनेन्द्रगढ़ भरतपुर संभाग के कार्यपालन अभियंता एनसी सिंह का मामला सबसे ज्यादा चौंकाने वाला है। एनसी सिंह 31 अक्टूबर 2026 को सेवानिवृत्त हो रहे हैं। ट्रांसफर पालिसी 2025 की कंडिका 1.6 में साफ लिखा है कि जिन अधिकारियों की सेवानिवृत्ति में एक वर्ष से कम का समय बचा हो उनका तबादला सिर्फ उनके विकल्प पर ही किया जाएगा। इसके बावजूद रिटायरमेंट से ठीक सात दिन पहले उनका तबादला मिनीमाता हसदेव बांगो परियोजना बिलासपुर कर दिया गया। उन्हें अंतिम दिनों में पेंडिंग बिल क्लियर कर दायित्वों से मुक्त होना था लेकिन आईडी ब्लॉक होने से वह भी फंस गए हैं। हाई कोर्ट के स्पष्ट निर्देशों के बाद भी यह कार्रवाई की गई है।

आदेश में शामिल 15 अभियंताओं की सूची

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छत्तीसगढ़ कार्य विभाग नियमावली 2006 का खुला उल्लंघन

नियमावली के खंड एक की कंडिका 1.095 से 1.103 के अनुसार प्रभार हस्तांतरण के दिन दोनों अधिकारियों के हस्ताक्षर से नकद शेष और चेक का नोट दर्ज होता है। कार्यमुक्त होने वाला अधिकारी लंबित बिलों की सूची सौंपता है। बिना उत्तराधिकारी के आए मुख्यालय नहीं छोड़ा जा सकता। एमआईएस प्रभारी ने यह वित्तीय दायित्व बिना चार्ज रिपोर्ट के ही छीनकर सिविल सेवा कार्यग्रहण अवधि नियम 1982 की धज्जियां उड़ा दी हैं।

प्रभारी की सख्त हिदायत के बाद भी अफसरशाही बेलगाम

मुख्यमंत्री के विभाग में यह अफसरशाही तब सामने आई है जब इसी सप्ताह 25 और 26 अक्टूबर को भाजपा की नई प्रदेश प्रभारी स्मृति ईरानी ने रायपुर में बैठक ली थी। बैठक में पूर्व मंत्रियों और विधायकों ने स्पष्ट कहा था कि प्रदेश में अफसरशाही हावी है और जनप्रतिनिधियों की सुनवाई नहीं होती। इस सख्त हिदायत के बाद भी जल संसाधन विभाग के एमआईएस प्रकोष्ठ का यह रवैया बता रहा है कि अफसरों पर संगठन की बैठकों का जमीनी स्तर पर कोई असर नहीं हो रहा है।

विभागीय वेंडर और सप्लायर इस रवैये के खिलाफ लामबंद हो रहे हैं। आने वाले दिनों में ठेकेदार संघ इस पूरे प्रकरण और एमआईएस प्रभारी की मनमानी की शिकायत सीधे मुख्यमंत्री कार्यालय में दर्ज कराने की तैयारी कर रहा है जिसके बाद विभाग के आला अधिकारियों से जवाब तलब किया जा सकता है।