
2013 में कोर्ट से भागने के बाद अंबिकापुर के मोमिनपुरा में छिपा था
अंबिकापुर। 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' फिल्म की असल कहानी का गैंगस्टर शब्बीर आलम अंबिकापुर में कई सालों से छिपा हुआ था। वह साल 2013 में झारखंड के धनबाद कोर्ट से भाग गया था। तब से वह अंबिकापुर के मोमिनपुरा इलाके में अपनी पहचान छिपाकर रह रहा था। 3 दिन पहले झारखंड की धनबाद पुलिस उसे पकड़ने अंबिकापुर पहुंची थी, लेकिन वह एक बार फिर से भागने में कामयाब हो गया।
सादे कपड़ों में आई थी पुलिस, लोगों ने किया विरोध
धनबाद पुलिस को जब यह सूचना मिली कि वासेपुर का गैंगस्टर शब्बीर आलम अंबिकापुर में है, तो वे 3 दिन पहले उसे गिरफ्तार करने यहां आ गए। उन्होंने इस कार्रवाई की सूचना स्थानीय सरगुजा पुलिस को नहीं दी। धनबाद पुलिस सादे कपड़ों में थी। जब उन्होंने शब्बीर के ठिकाने पर छापा मारा, तो सादे कपड़ों की वजह से उन्हें स्थानीय लोगों का भारी विरोध झेलना पड़ा। इसी हंगामे और विरोध का मौका पाकर गैंगस्टर शब्बीर आलम वहां से फरार हो गया।
वारंटी के भाग जाने के बाद सरगुजा पुलिस को बताया
गैंगस्टर शब्बीर आलम के फरार हो जाने के बाद धनबाद पुलिस ने अंबिकापुर की सरगुजा पुलिस को इसकी सूचना दी। सरगुजा के एसएसपी राजेश अग्रवाल ने बताया कि जब धनबाद पुलिस इस वारंटी को पकड़ने आई थी, तो उन्होंने हमें कोई सूचना नहीं दी थी। जब वारंटी हाथ से निकल गया और फरार हो गया, तब जाकर हमें सूचना दी गई। इसके बाद सरगुजा पुलिस ने आरोपी की तलाश शुरू की, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चल पाया। फिलहाल आरोपी की तलाश जारी है।
कोल माफिया फहीम खान की मां और मौसी को मारी थी गोली
झारखंड (तब बिहार) के धनबाद जिले के वासेपुर में गैंगस्टर शब्बीर आलम और कोल माफिया डॉन फहीम खान के परिवारों के बीच कोयले की वसूली और वर्चस्व को लेकर पुरानी खूनी रंजिश थी। इसी दुश्मनी के चलते 18 अक्टूबर 2001 को शब्बीर खान और उसके भाई साहिद ने अपने साथियों के साथ मिलकर डॉन फहीम खान की मां नजमा खातून और मौसी शहनाज खातून को गोलियों से भून दिया था। दोनों महिलाएं जब बाजार से लौट रही थीं, तब डायमंड क्रॉसिंग के पास उन पर गोलियां चलाई गई थीं, जिससे दोनों की मौत हो गई थी।
सातों आरोपियों को हो चुकी है आजीवन कारावास की सजा
इस मामले में पुलिस ने वर्ष 2013 में शब्बीर आलम, उसके भाई शाहिद आलम समेत कुल 7 लोगों को गिरफ्तार किया था। इसी दौरान शब्बीर आलम पुलिस को चकमा देकर फरार हो गया था। बाद में वर्ष 2018 में धनबाद कोर्ट ने मामले के सातों आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। पुलिस लगातार शब्बीर आलम की तलाश में थी और कोर्ट ने उसके खिलाफ वारंट भी जारी किया था।
बता दें कि वासेपुर के इन्ही गैंगस्टर्स की कहानी से प्रेरित होकर डायरेक्टर अनुराग कश्यप ने 2012 में 'गैंग्स ऑफ वासेपुर' मूवी बनाई थी। इसमें डॉन फहीम खान का किरदार मूवी के पहले भाग में मनोज वाजपेयी ने निभाया था।