ऑफिस में हाजिरी, स्क्रीन टाइम और प्रोडक्टिविटी ट्रैक करने वाले ऐप अब सिर्फ काम पर नजर नहीं रख रहे, बल्कि कर्मचारियों की निजी जिंदगी में भी दखल देने लगे हैं। एक नई स्टडी में खुलासा हुआ है कि कई लोकप्रिय वर्कप्लेस मॉनिटरिंग ऐप कर्मचारियों का निजी डेटा Google, Meta और Microsoft जैसी बड़ी टेक कंपनियों के साथ शेयर कर रहे हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों के नाम, ईमेल, लोकेशन, आईपी एड्रेस, डिवाइस डिटेल और ऑनलाइन एक्टिविटी तक बाहरी कंपनियों तक पहुंच रही है। इस खुलासे ने डिजिटल प्राइवेसी और वर्कप्लेस सर्विलांस को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

किन ऐप्स पर उठे सवाल?
स्टडी को Columbia Law School, Northeastern University, Vanderbilt University और University of California, Berkeley के रिसर्चर्स ने मिलकर किया। जांच में जिन मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म्स पर सवाल उठे, उनमें Hubstaff, Time Doctor, Monitask और Desklog जैसे ऐप्स शामिल रहे। ये प्लेटफॉर्म कंपनियों को कर्मचारियों के स्क्रीनशॉट,कीबोर्ड एक्टिविटी, लोकेशन, स्क्रीन टाइम और प्रोडक्टिविटी डेटा ट्रैक करने की सुविधा देते हैं।

Google-Facebook तक पहुंचा कर्मचारियों का डेटा
रिपोर्ट में दावा किया गया कि रिसर्च के दौरान कुल 121 ऐसे मामले सामने आए, जहां कर्मचारियों का डेटा गूगल, मेटा, माइक्रोसॉफ्ट और दूसरी कंपनियों तक पहुंचा।

इसके अलावा आईपी एड्रेस, डिवाइस जानकारी,इस्तेमाल की गई वेबसाइट्स, नेटवर्क डेटा जैसी संवेदनशील जानकारियां 145 बाहरी कंपनियों के साथ साझा की गईं। इनमें LinkedIn, Bing और Yandex जैसे प्लेटफॉर्म भी शामिल बताए गए हैं।

लोकेशन ट्रैकिंग ने बढ़ाई चिंता
स्टडी में यह भी सामने आया कि कई “Bossware” ऐप कर्मचारियों की लोकेशन बैकग्राउंड में भी ट्रैक करते रहे, यहां तक कि काम के घंटे खत्म होने के बाद भी।

रिसर्चर्स का कहना है कि यह कर्मचारियों की निजी जिंदगी में दखल है, कर्मचारियों के पास इन ऐप्स को मना करने का विकल्प नहीं होता। नौकरी खोने के डर से लोग मजबूरन निगरानी स्वीकार करते हैं।  

डेटा से कैसे कमाई कर रही कंपनियां?
रिपोर्ट के अनुसार, कई मॉनिटरिंग प्लेटफॉर्म अब उसी मॉडल पर काम कर रहे हैं जिसे लंबे समय से बड़ी इंटरनेट कंपनियां इस्तेमाल करती रही हैं, ज्यादा से ज्यादा डेटा इकट्ठा करो और उसका व्यावसायिक इस्तेमाल करो।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इन जानकारियों के जरिए कंपनियां यह समझने की कोशिश करती हैं:

  • कर्मचारी कब एक्टिव है
  • किस नेटवर्क से जुड़ा है
  • उसका व्यवहार कैसा है

नौकरी बदलने की संभावना कितनी है
विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर डेटा सुरक्षा को लेकर सख्त नियम नहीं बने, तो आने वाले समय में कर्मचारियों की डिजिटल प्राइवेसी और आर्थिक सुरक्षा दोनों खतरे में पड़ सकती हैं।