रायपुर। छत्तीसगढ़ में खरीफ विपणन वर्ष 2025-26 की धान खरीदी को लेकर बड़े पैमाने पर अनियमितताओं के मामले सामने आए हैं। राज्यभर में चल रहे भौतिक सत्यापन (फिजिकल वेरिफिकेशन) के दौरान एक दर्जन से अधिक जिलों में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच भारी अंतर मिला है। जांच में फर्जी धान खरीदी, स्टॉक में कमी, बिना अनुमति खरीदी, टोकन में हेरफेर, घटिया धान की खरीद, बारदाना वितरण में अनियमितता और किसानों से कथित अवैध वसूली जैसे गंभीर मामले उजागर हुए हैं।

प्रारंभिक जांच के आधार पर कई खरीदी केंद्रों के समिति प्रबंधकों और कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने, निलंबन और विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। अधिकारियों का कहना है कि अभी सभी जिलों का भौतिक सत्यापन पूरा नहीं हुआ है, इसलिए आगे और गड़बड़ियां सामने आने की संभावना से भी इनकार नहीं किया जा सकता है।

एक दर्जन से अधिक जिलों में मिली गंभीर अनियमितताएं
जांच के दौरान दुर्ग, बेमेतरा, कबीरधाम, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा, सक्ती, रायगढ़, रायपुर, महासमुंद, गरियाबंद, जगदलपुर और बलौदाबाजार-भाटापारा समेत कई जिलों में धान खरीदी केंद्रों पर रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में बड़ा अंतर पाया गया है। जांच टीमों के अनुसार कई स्थानों पर हजारों क्विंटल धान रिकॉर्ड में दर्ज होने के बावजूद भंडारण स्थलों पर उपलब्ध नहीं मिला। कहीं बिना अराइवल स्लिप के खरीदी की गई, तो कहीं अवकाश के दिनों में भी खरीद दर्ज होने के मामले सामने आए। कुछ केंद्रों पर बारदाने के वितरण और स्टॉक रिकॉर्ड में भी गंभीर विसंगतियां मिली हैं।

कबीरधाम में करीब 7 करोड़ रुपये मूल्य के धान की गड़बड़ी
कबीरधाम जिले में जांच के दौरान सबसे गंभीर मामलों में से एक सामने आया है। जानकारी के अनुसार पंडरिया विकासखंड की बाघामुड़ा, रमतला और बघर्रा समितियों में लगभग 5 हजार क्विंटल धान रिकॉर्ड से कम पाया गया है। वहीं मरका समिति में रिकॉर्ड से अलग 110 बोरी अतिरिक्त धान मिलने का मामला भी सामने आया, जिससे रिकॉर्ड संधारण पर सवाल उठे हैं। जांच समिति ने मामले को गंभीर मानते हुए प्रकरण तैयार कर न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है। इसके अलावा सहसपुर लोहारा क्षेत्र के खरीदी केंद्रों में भी बड़ी मात्रा में धान और खाली बारदाने गायब पाए गए। प्रारंभिक आकलन के अनुसार जिले में लगभग 7 करोड़ रुपये मूल्य के धान की अनियमितता सामने आई है।

रायपुर में 12 खरीदी केंद्रों पर 6,590 क्विंटल धान कम
रायपुर जिले के विभिन्न उपार्जन केंद्रों में भी भारी गड़बड़ियां सामने आई हैं। जांच के दौरान 12 समितियों में कुल 6,590 क्विंटल धान की कमी दर्ज की गई।तिल्दा क्षेत्र के सरफोंगा उपार्जन केंद्र में 510 क्विंटल धान और 4,640 नग बारदाना कम मिला। वहीं रींवा केंद्र में 856 क्विंटल धान की कमी पाए जाने पर संबंधित समिति प्रबंधक के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की अनुशंसा की गई। इसी तरह फरफौद केंद्र में 734 क्विंटल धान कम मिलने पर प्रभारी समिति प्रबंधक के विरुद्ध कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की गई। देवरी उपार्जन केंद्र में भी 560 क्विंटल धान और 5,660 नग बारदाने की कमी सामने आने के बाद जांच तेज कर दी गई है।

दुर्ग में 27,900 क्विंटल धान रिकॉर्ड से कम
दुर्ग जिले के 61 से अधिक धान खरीदी केंद्रों की जांच में लगभग 27,900 क्विंटल धान रिकॉर्ड से कम पाया गया। इसकी अनुमानित कीमत करीब ढाई करोड़ रुपये बताई जा रही है। रिपोर्ट के अनुसार सबसे अधिक 4,646 क्विंटल धान की कमी धमधा समिति में मिली है। इसके अलावा करेली, बरहापुर, डीडाभाठा और केसरा समितियों में भी भारी अंतर पाया गया। जांच में संकेत मिले हैं कि कई मामलों में खरीदी प्रक्रिया से अधिक धान के उठाव, परिवहन, भंडारण और रिकॉर्ड मिलान के दौरान अनियमितताएं हुई हैं। सरना धान में अकेले 22,802 क्विंटल की कमी दर्ज की गई। धमधा और जामगांव आर समिति के प्रभारियों के खिलाफ पहले ही आपराधिक प्रकरण दर्ज किए जा चुके हैं तथा एक प्रभारी को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।

बेमेतरा के लेंजवारा केंद्र में भी बड़ा अंतर
बेमेतरा जिले के सरदार लेंजवारा खरीदी केंद्र में रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक के बीच गंभीर अंतर पाया गया है। जांच में यहां 53,639 क्विंटल धान कम मिलने की बात सामने आई है। खाद्य, राजस्व और जिला प्रशासन की संयुक्त जांच टीम की रिपोर्ट के आधार पर जिला सहकारी बैंक ने संबंधित खरीदी केंद्रों के प्रभारियों को नोटिस जारी करने और मामले को पुलिस जांच के लिए भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।

कई जिलों में FIR और निलंबन की कार्रवाई
बिलासपुर जिले में 920 बोरी धान गायब मिलने के बाद खरीदी केंद्र प्रभारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई। जांजगीर-चांपा में अवकाश के दिन धान खरीदी स्वीकार करने के मामले में तीन कर्मचारियों को निलंबित किया गया, जबकि टोकन में कथित हेरफेर के आरोप में एक कंप्यूटर ऑपरेटर के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। रायपुर जिले के नरदहरा केंद्र में किसानों से कथित अवैध वसूली के आरोप में क्लर्क-कम-ऑपरेटर को सेवा से हटा दिया गया। महासमुंद जिले के पिर्धा और सिंहबहल खरीदी केंद्रों के प्रभारियों के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई है। इसके अलावा जगदलपुर, गरियाबंद और बलौदाबाजार-भाटापारा सहित कई जिलों में भी स्टॉक में अंतर, नीति उल्लंघन और रिकॉर्ड में गड़बड़ियों के आधार पर संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।

सत्यापन जारी, और मामलों के खुलने की संभावना
अधिकारियों का कहना है कि राज्य के सभी जिलों में भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया अभी पूरी नहीं हुई है। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ेगी, अन्य जिलों से भी नए मामले सामने आ सकते हैं। सरकार ने स्पष्ट किया है कि धान खरीदी में किसी भी स्तर पर गड़बड़ी या वित्तीय अनियमितता पाए जाने पर जिम्मेदार अधिकारियों, समिति प्रबंधकों और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कानूनी एवं विभागीय कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल जांच एजेंसियां दस्तावेजों, स्टॉक रजिस्टर और वास्तविक भंडारण का मिलान कर पूरे मामले की विस्तृत जांच में जुटी हुई हैं।