बिलासपुर | आषाढ़ महीने के शुक्ल पक्ष की गुप्त नवरात्रि इस साल 15 जुलाई से शुरू हो रही है। इसका समापन 22 जुलाई को भड़ली नवमी के साथ होगा। इस बार नवरात्रि की शुरुआत में मातंग, हर्षण, गजकेसरी, बुधादित्य योग और पुष्य नक्षत्र का शुभ संयोग बन रहा है। पूरे आठ दिनों तक शहर के देवी मंदिरों में कलश स्थापना, दुर्गा सप्तशती का पाठ और दस महाविद्याओं की विशेष साधना होगी। मंदिरों में पुजारियों और श्रद्धालुओं ने अभी से अपनी तैयारियां शुरू कर दी हैं।

15 जुलाई से क्यों शुरू होगी नवरात्रि?

व्यंकटेश मंदिर के महंत डॉ. कौशलेंद्र प्रपत्राचार्य के अनुसार, आषाढ़ शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि 14 जुलाई दोपहर 3:14 बजे से लग जाएगी। यह अगले दिन 15 जुलाई को सुबह 11:51 बजे तक रहेगी। क्योंकि 15 जुलाई को सूर्योदय के समय यह तिथि मौजूद रहेगी, इसलिए शास्त्रों के अनुसार नवरात्रि की शुरुआत 15 जुलाई से ही मानी जाएगी।

गुरु तारा अस्त, फिर भी भड़ली नवमी पर होंगे मांगलिक काम

16 जुलाई से गुरु तारा अस्त हो रहा है। आमतौर पर गुरु तारा अस्त होने पर शादी-विवाह जैसे मांगलिक काम नहीं किए जाते। लेकिन 22 जुलाई को गुप्त नवरात्रि के समापन पर भड़ली नवमी का पर्व है। भड़ली नवमी को शास्त्रों में अबूझ मुहूर्त माना गया है। इसलिए इस दिन बिना मुहूर्त निकाले भी शादी, गृह प्रवेश और अन्य शुभ कार्य आसानी से किए जा सकेंगे।

19 जुलाई को बनेंगे दो बड़े योग

नवरात्रि को लेकर पीतांबरा पीठ, तिफरा काली मंदिर और शहर के दूसरे देवी मंदिरों में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। 19 जुलाई को सुबह 6:01 बजे से अगले दिन सुबह तक सर्वार्थ सिद्धि योग बन रहा है। इसी दिन शाम 6:12 बजे से 20 जुलाई सुबह 6:01 बजे तक अमृत योग भी रहेगा। ज्योतिष शास्त्र में इन दोनों योगों को पूजा, जप, दान, यज्ञ और शुभ कार्यों के लिए उत्तम माना जाता है।

दस महाविद्याओं की साधना का है महत्व

पीतांबरा पीठ के पीठाधीश्वर आचार्य डॉ. दिनेश महाराज ने बताया कि साल भर में कुल चार नवरात्रि आती हैं। चैत्र और शारदीय नवरात्रि को सार्वजनिक रूप से मनाया जाता है, लेकिन आषाढ़ और माघ महीने की नवरात्रि गुप्त होती है। इसमें दस महाविद्याओं की साधना गुप्त तरीके से की जाती है।

इस दौरान श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी करने के लिए मां काली, तारा, त्रिपुर सुंदरी, भुवनेश्वरी, छिन्नमस्ता, त्रिपुर भैरवी, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला की विशेष पूजा करेंगे। मां बगलामुखी की पूजा खासतौर पर मुकदमों में जीत, विवादों को सुलझाने, संकटों से बचने, ग्रह शांति और संतान प्राप्ति की कामना से की जाती है। मान्यता है कि इस दौरान नियम से साधना करने पर संकल्प पूरे होते हैं और जीवन की परेशानियां दूर होती हैं। इन आठ दिनों में भक्त अपनी मुरादें पूरी करने के लिए व्रत और अनुष्ठान भी करेंगे।