
बिलासपुर। जिले में नए शिक्षा सत्र 2026-27 की शुरुआत हो चुकी है। इसे देखते हुए स्कूली बच्चों के सुरक्षित आवागमन के लिए यातायात बिलासपुर पुलिस ने पूरी तैयारी कर ली है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) रजनेश सिंह और अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (यातायात) रामगोपाल करियारे के मार्गदर्शन में सभी स्कूल प्रबंधकों, बस संचालकों और अभिभावकों के लिए विशेष अपील जारी की गई है। जिले में बच्चों के परिवहन के लिए 400 से ज्यादा स्कूली वाहन संचालित हैं। इसे ध्यान में रखते हुए माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा तय की गई 18 सूत्रीय मार्गनिर्देशिका का पालन हर हाल में करने के निर्देश दिए गए हैं।
यातायात पुलिस के निर्देशों के अनुसार, स्कूल बस का रंग पीला होना अनिवार्य है। बस के चारों तरफ स्कूल का नाम और टेलीफोन नंबर लिखा होना चाहिए। बस के आगे और पीछे 'स्कूल बस' लिखा होना चाहिए। अगर बस किसी अन्य व्यक्ति से किराए पर ली गई है, तो उस पर 'ऑन स्कूल ड्यूटी' लिखना अनिवार्य है। बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए खिड़कियों पर मजबूत क्षैतिज ग्रिल लगी होनी चाहिए। इसके अलावा, बस में बैग रखने के लिए सीट के नीचे जगह, सुरक्षित लॉक वाले दरवाजे, चालू हालत में अग्निशमन यंत्र, फर्स्ट-एड बॉक्स और गति को नियंत्रित रखने के लिए स्पीड गवर्नर लगा होना चाहिए।
तकनीकी निगरानी की पुख्ता व्यवस्था
बच्चों की निगरानी के लिए हर बस में सीसीटीवी कैमरे, जीपीएस सिस्टम और पैनिक बटन का होना अनिवार्य कर दिया गया है। साथ ही, किसी भी आपात स्थिति के लिए बस में आपातकालीन खिड़की या निकास द्वार की उचित व्यवस्था होनी चाहिए।
चालक और परिचालक के लिए नियम:
स्कूल बस चलाने वाले ड्राइवर के पास भारी वाहन चलाने का कम से कम 5 साल का अनुभव होना चाहिए। उसका कोई पुराना ट्रैफिक चालान या आपराधिक रिकॉर्ड दर्ज नहीं होना चाहिए। बच्चों की देखभाल के लिए बस में एक प्रशिक्षित कंडक्टर का होना जरूरी है। बालिकाओं को लाने-ले जाने वाली बसों में महिला परिचारिका की उपस्थिति अनिवार्य रूप से सुनिश्चित करने को कहा गया है। शराबी और नशे के आदी ड्राइवरों को किसी भी स्थिति में काम पर न रखने की सख्त हिदायत दी गई है।
**प्रबंधन की जिम्मेदारी और अभिभावकों से अपील:**
पुलिस ने निर्देश दिए हैं कि किसी भी बस में निर्धारित क्षमता से ज्यादा बच्चों को नहीं बैठाया जाए। बस चालक और परिचालक का पुलिस वेरिफिकेशन और स्वास्थ्य परीक्षण अनिवार्य रूप से कराया जाए। स्कूलों में बच्चों के परिवहन में लगे सभी वाहनों की फिटनेस जांच, बीमा और प्रदूषण प्रमाण पत्र अपडेट रखे जाएं। खुले और असुरक्षित वाहनों में बच्चों को न बैठाएं। यातायात पुलिस ने अभिभावकों से भी कहा है कि वे नाबालिग बच्चों को स्कूल जाने के लिए वाहन चलाने न दें। अगर कोई ड्राइवर लापरवाही से गाड़ी चलाता है, तो शिकायत के लिए बस के बाहरी हिस्से पर मोबाइल नंबर लिखा होना चाहिए। पुलिस ने सभी नागरिकों और स्कूल प्रबंधन से सड़क सुरक्षा नियमों का गंभीरता से पालन करने को कहा है।