रायपुर। छत्तीसगढ़ में हर मंगलवार को पुलिस महानिदेशक (DGP) अरुण देव गौतम पुलिस कर्मचारियों और उनके परिजनों से रूबरू होकर उनकी समस्याएं सुनते हैं। लेकिन 30 जून 2026 का मंगलवार पुलिस मुख्यालय (PHQ) में एक अलग ही नजारा देखने को मिला। इस बार डीजीपी से मिलने कोई आम फरियादी नहीं, बल्कि पिछले 8 से 10 वर्षों से नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में पदस्थ 200 निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों के परिवार वाले पहुंचे थे। परिजनों ने 4 दिन पहले ही मुलाकात के लिए लिखित सूचना दे दी थी, लेकिन उन्हें डीजीपी से मिलने का समय नहीं दिया गया। आरोप है कि डीजीपी अन्य लोगों से मिलते रहे, लेकिन इन परिवारों से मिलने से उन्होंने मना कर दिया।

इस घटनाक्रम के बाद यह चर्चा तेज हो गई है कि पुलिस मुख्यालय फिलहाल लंबे समय से नक्सल क्षेत्रों में तैनात निरीक्षकों और उपनिरीक्षकों का ट्रांसफर करने के इरादे में नहीं है।

 

नियम 3 साल का, लेकिन 10 साल से फंसे हैं अधिकारी

 

मुलाकात न हो पाने के कारण परिजनों में काफी रोष देखा गया। इतनी दूर से सफर करके आए लगभग 200 पुलिसकर्मियों के माता-पिता, पत्नी, बच्चे और भाई-बहनों का कहना था कि वे केवल यह पूछने आए थे कि उनके परिजनों का ट्रांसफर मैदानी इलाकों में कब होगा।

परिजनों ने बताया कि ट्रांसफर के लिए पहले भी कई बार आवेदन दिए जा चुके हैं, जिन पर आज तक कोई सुनवाई नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि हाईकोर्ट में लगाई गई एक याचिका के जवाब में पुलिस विभाग की तरफ से कहा गया था कि 3 साल में अनुसूचित क्षेत्रों में पदस्थ कर्मचारियों का मैदानी इलाकों में स्थानांतरण किया जाता है। परिजनों का सीधा सवाल है कि अगर नियम 3 साल का है, तो 200 से अधिक निरीक्षक और उपनिरीक्षक 8 से 10 साल से नक्सल क्षेत्रों में कैसे फंसे हुए हैं? परिजनों का मानना है कि डीजीपी जवाब देने से बचने के लिए सीधे मिलने से मना कर दिए।

 

मुख्यालय बना छावनी, दीवान ने उठाए सवाल

 

इस पूरे मामले पर सँयुक्त पुलिस कर्मचारी एवं परिवार कल्याण संघ के अध्यक्ष उज्जवल दीवान ने कड़ी आपत्ति जताई है। दीवान ने कहा कि डीजीपी 4 घण्टे का पॉडकास्ट कर सकते हैं, लेकिन 4 दिन पहले सूचना देने के बाद भी पुलिस परिवार की समस्या सुनने के लिए 1 मिनट का समय नहीं निकाल सके। उन्होंने कहा कि अगर डीजीपी के ऊपर कोई दबाव है, तो वे हमें बताएं, हम सीधे दबाव बनाने वाले व्यक्ति से बात करके निष्कर्ष निकालेंगे।

दीवान ने आरोप लगाया कि मंगलवार को पुलिस परिवार को रोकने के लिए मुख्यालय में पूरा फोर्स लगा दिया गया था। पुलिस मुख्यालय को पुलिस बल से घेर कर पूरी तरह छावनी बना दिया गया था। उन्होंने कहा कि परिवार के सदस्यों से न मिलना यह बताता है कि डीजीपी के पास हमारे सवालों के जवाब नहीं हैं। अगर वे सही होते तो सवालों का सामना करते।

उज्जवल दीवान ने कहा कि आज की घटना से यह साबित हो गया है कि अधिकारी स्वयं निर्णय लेने में हिचक रहे हैं और किसी और के निर्देश का पालन कर रहे हैं। इस कृत्य से पुलिस विभाग के तृतीय श्रेणी पुलिस कर्मचारियों और उनके परिजनों को काफी निराशा हुई है। पुलिस परिवार के बुजुर्ग माता-पिता, महिलाएं और बच्चे जो उम्मीद लेकर आए थे, उन्हें बिना जवाब पाए ही वापस लौटना पड़ा।